राष्ट्रीय शिक्षा नीति को प्रभावी ढंग से लागू करना और उसके लिए सबका मन बनाना बड़ा टास्क— बोर्ड अध्यक्ष

It is a big task to effectively implement the National Education Policy (NEP)-2020 and convince everyone for it – Board Chairman

अजमेर, 22 जून(हि.स.)। राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (आरबीएसई) को लगभग चार वर्षों के अंतराल के बाद स्थायी अध्यक्ष मिल गया है। वरिष्ठ शिक्षाविद् हनुमान सिंह राठौड़ ने सोमवार को बोर्ड के 41वें अध्यक्ष के रूप में पदभार ग्रहण किया। पदभार संभालने के बाद उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)-2020 को प्रभावी ढंग से लागू करना बोर्ड की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल होगा और इसके लिए शिक्षकों, विद्यार्थियों तथा शिक्षा जगत के सभी हितधारकों को साथ लेकर आगे बढ़ना आवश्यक है।

राठौड़ ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति केवल पाठ्यक्रम परिवर्तन तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा की संपूर्ण कार्यप्रणाली में गुणात्मक सुधार का माध्यम है। इसके सफल क्रियान्वयन के लिए पाठ्यपुस्तकों का पुनर्संरचना, शिक्षकों का प्रशिक्षण तथा प्रश्नपत्र निर्माण में आवश्यक बदलाव किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धा के अनुरूप तैयार करना समय की आवश्यकता है और बोर्ड इसी दिशा में कार्य करेगा।

सोमवार दोपहर उन्होंने बोर्ड मुख्यालय में पदभार ग्रहण किया। इस अवसर पर बोर्ड परिसर में कर्मचारियों और अधिकारियों ने उनका पारंपरिक स्वागत किया। कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के महानगर संघचालक खाजूलाल चौहान, स्वयं सेवक सुनील दत्त जैन, निरंजन शर्मा बोर्ड सचिव नीतू, परीक्षा नियंत्रक के. राजेश निर्वाण, वित्तीय सलाहकार के.पी. सिंह, सहायक उपनिदेशक जनसंपर्क राजीव चतुर्वेदी, कर्मचारी संघ के अध्यक्ष मोहन सिंह रावत, महामंत्री करण सिंह यादव सहित अनेक अधिकारी, कर्मचारी और शुभचिंतक उपस्थित रहे।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2022 में तत्कालीन अध्यक्ष डी.पी. जारोली की बर्खास्तगी के बाद बोर्ड अध्यक्ष का पद रिक्त था और इस दौरान प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को प्रशासक के रूप में जिम्मेदारी सौंपी जाती रही। ऐसे में राठौड़ की नियुक्ति को बोर्ड के लिए स्थायी नेतृत्व की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

मीडिया से बातचीत में राठौड़ ने कहा कि बोर्ड की कार्यप्रणाली पहले से सुदृढ़ है और उनका उद्देश्य किसी बड़े बदलाव के बजाय इसे और अधिक प्रभावी तथा परिणामोन्मुख बनाना है। उन्होंने बोर्ड के कर्मचारियों और अधिकारियों की कार्यक्षमता की सराहना करते हुए कहा कि टीम भावना के साथ कार्य करने से किसी भी चुनौती का समाधान संभव है।

विशेष बात यह है कि राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के इतिहास में पहली बार स्कूली शिक्षा से सीधे जुड़े किसी शिक्षाविद् को अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। राठौड़ लंबे समय तक विद्यालयी शिक्षा से जुड़े रहे हैं तथा वर्ष 2018 में माध्यमिक विद्यालय के प्राचार्य पद से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली थी। उन्होंने शिक्षा क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देते हुए 25 से अधिक पुस्तकों का लेखन भी किया है।

उनकी नियुक्ति पर शिक्षा, सामाजिक और प्रशासनिक क्षेत्रों में व्यापक स्वागत किया जा रहा है। अजमेर दक्षिण की विधायक अनिता भदेल ने इसे राज्य सरकार का सराहनीय निर्णय बताते हुए कहा कि राठौड़ का अनुभव और शैक्षिक दृष्टि बोर्ड को नई दिशा प्रदान करेगी। शिक्षा जगत में भी उनकी नियुक्ति को सकारात्मक और दूरगामी प्रभाव वाला कदम माना जा रहा है।

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