मुंबई, 21 मई (हि.स.)। महाराष्ट्र सरकार की नई तबादला नीति के विरोध में नर्सों ने गुरुवार को विरोध प्रदर्शन किया। मुंबई समेत पूरे राज्य में नर्सों का आंदोलन हुआ। उनका आरोप है कि अस्पताल के भीतर एक विभाग से दूसरे विभाग में ड्यूटी बदलना ही तबादला माना जाए, लेकिन उन्हें एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भेजना अन्यायपूर्ण है। इस नीति से तत्काल प्रभाव से उन्हें बाहर किया जाए।
महाराष्ट्र गवर्नमेंट नर्सेस फेडरेशन के नेतृत्व में चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत आने वाले सरकारी अस्पतालों में कार्यरत नर्सों ने सरकारी नीति के खिलाफ आंदोलन किया। नर्सों ने बताया कि बार-बार तबादले से परिवार व्यवस्था बिगड़ेगी, बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होगी और वर्षों से सेवा दे रही महिला कर्मियों पर मानसिक व सामाजिक दबाव बढ़ेगा। वित्तीय जिम्मेदारी वाले पद पर कार्यरत नहीं हैं, बल्कि पूरी तरह सेवाभावी भूमिका निभाती हैं। उनके लिए सामान्य प्रशासनिक तबादला नीति लागू करना उचित नहीं है।
बृहन्मुंबई राज्य सरकारी परिचारिका संगठन की महासचिव कविता ठोंबरे ने कहा कि अन्य शहरों या अस्पतालों में भेजने से उनके परिवार और सामाजिक जीवन पर गंभीर असर पड़ता है। परिचारिका संवर्ग में लगभग 90 प्रतिशत महिलाएं हैं। बार-बार तबादलों के कारण परिवार व्यवस्था बिगड़ रही है और बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। नर्सिंग एक अत्यावश्यक और संवेदनशील सेवा है, इसलिए इस संवर्ग को मौजूदा तबादला नीति से बाहर रखा जाना चाहिए। उनका केवल स्वैच्छिक तबादला ही किए जाए और जबरन ट्रांसफर की नीति वापस ली जाए।
संगठन के महासचिव गणेश बकशेटी ने कहा कि कोरोना महामारी और अन्य मेडिकल आपात स्थितियों में नर्सों ने अपने परिवार की चिंता किए बिना दिन-रात मरीजों की सेवा की। आज वही नर्सें अपने अधिकारों और सम्मान की रक्षा के लिए आंदोलन करने को मजबूर हैं। नर्सों की सेवाभावी भूमिका का सम्मान करते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से तबादला नीति से स्थायी रूप से बाहर किया जाना चाहिए।
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