प्रदेश कांग्रेस का दावा- चीनी सेना अरुणाचल की ज़मीन का कर रही अतिक्रमण
- DSS Admin
- Jun 29, 2026
-सोसाइटी ने भारतीय सेना पर जताया भरोसा
इटानगर, 29 जून (हि.स.)। अरुणाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (एपीसीसी) ने आज दावा किया कि, चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने अरुणाचल प्रदेश के टक्सिंग सर्कल में हमारी ज़मीन पर अतिक्रमण करके मिलिट्री कैंप बना लिए हैं।
पीएलए द्वारा ज़मीन पर अतिक्रमण के मुद्दे पर गहरी चिंता जताते हुए, अरुणाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष बोसीराम सिराम ने कहा कि, टाक्सिंग सर्कल के निवासियों का आरोप है कि चीनी सेना ने मिलिट्री कैंप बनाकर, सड़कें और पुल बनाकर और इलाके में गश्त बढ़ाकर उनकी पुश्तैनी ज़मीन पर अतिक्रमण कर लिया है।
अरुणाचल प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में मीडिया के साथ आज बातचीत करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष ने दावा किया कि, साल 2000 तक 'शेरा 1' से 'शेरा 5' तक का इलाका भारत और अरुणाचल प्रदेश के नियंत्रण में था, लेकिन पिछले 10 सालों में ज़्यादातर हिस्से पर चीन ने अतिक्रमण कर लिया है, जो चिंताजनक और निंदनीय है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, यह सब केंद्र की भाजपा सरकार की कमज़ोरी के कारण हुआ है। सरकार ने समय पर कार्रवाई नहीं की, जिसके परिणामस्वरूप चीन ने हमारी ज़मीन पर अतिक्रमण कर लिया।
बोसीराम सिराम ने कहा, यह आरोप नाह वेलफेयर सोसाइटी ने लगाए हैं, जिसने इस मामले में दखल की मांग करते हुए अपर सुबनसिरी के उपायुक्त को एक ज्ञापन सौंपा है।
ज्ञापन के अनुसार, टक्सिंग के पास सीमा पार चीनी सेना की गतिविधियां पिछले 10 से 15 सालों में काफी बढ़ गई हैं, जिसका कथित मकसद और ज़्यादा इलाके पर अतिक्रमण करना है।
कांग्रेस ने कहा कि सोसाइटी ने दावा किया है कि असाफिला इलाके में ओयिंग, चुजार्टा इलाके में पनियार, मारपन (मारनाफे), पोर्ट्रांग झील और टिंगडिंगटांग जैसे इलाकों पर पीएलए ने अतिक्रमण कर लिया है। आरोप है कि इन जगहों पर, जिनका इस्तेमाल ग्रामीण पारंपरिक रूप से शिकार, याक चराने, औषधीय पौधे और वन उत्पाद इकट्ठा करने के लिए करते थे, अब चीनी मिलिट्री कैंप हैं जो सड़कों से जुड़े हुए हैं।
सोसाइटी के आरोपों में कहा गया है कि चीनी मिलिट्री चौकियां मारपन तक आगे बढ़ गई हैं, जबकि सड़क निर्माण लगभग युमिचू नदी तक पहुंच गया है, जहां कहा जाता है कि पीएलए के जवान टक्सिंग से लगभग दो किलोमीटर दूर लॉन्ग ओपी में एक हैंगिंग ब्रिज के पास नियमित रूप से गश्त करते हैं।
सोसाइटी ने यह भी दावा किया कि याजा गांव से लगभग चार किलोमीटर दूर पाक्ते लॉन्गपाक के पास पीएलए की गश्त की खबरें मिली हैं, और आरोप लगाया कि चीन ने दामुदी की ओर अपने क्षेत्रीय दावों का विस्तार किया है। सोसायटी ने कहा कि ग्रामीणों की पहुंच कई पारंपरिक चरागाहों—जैसे पोर्ट्रांग झील, केजुला दर्रा और ओजुमेडा—तक खत्म हो गई है। इस वजह से उन्हें सीमा के दोनों ओर मौजूद सुरक्षा बलों की नज़र से बचते हुए दूर से ही अपने मवेशियों पर नज़र रखनी पड़ती है।
हालांकि, सोसायटी ने भारतीय सेना पर भरोसा जताया और कहा कि सेना ने वर्षों से सीमा की सुरक्षा की है। सोसायटी का कहना है कि सेना के जवान इलाके में गश्त तो कर रहे हैं, लेकिन चीनी सेना की बढ़ती गतिविधियों के कारण कुछ कैंप नीचे की ओर हटा दिए गए हैं। साथ ही, सैनिकों ने बताया है कि किसी भी कार्रवाई के लिए उन्हें उच्च अधिकारियों से निर्देश लेने होंगे।

