30 लाख की रंगदारी, बिल्डरों में दहशत फैलाने की साजिश नाकाम, पांच गिरफ्तार
- DSS Admin
- Jul 07, 2026
नई दिल्ली, 07 जुलाई (हि.स.)। मध्य जिले के पहाड़गंज में 30 लाख रुपये की रंगदारी मांगने और इनकार करने पर बिल्डर के कार्यालय में फायरिंग करने के मामले का दिल्ली पुलिस ने पर्दाफाश कर दिया है। जांच में खुलासा हुआ कि यह कोई सामान्य रंगदारी की वारदात नहीं थी, बल्कि स्थानीय बिल्डरों में दहशत फैलाकर वर्चस्व कायम करने और कारोबारी प्रतिद्वंद्विता खत्म करने के लिए रची गई सुनियोजित साजिश थी। इस मामले में दिल्ली पुलिस की मध्य जिला टीम ने अब तक पांच आरोपितों को गिरफ्तार किया है, जिनमें मुख्य शूटर, एक स्थानीय बिल्डर, होटल कारोबारी और अंतरराज्यीय गैंग के सदस्य शामिल हैं।
मध्य जिले के पुलिस उपायुक्त रोहित राजबीर सिंह ने मंगलवार को बताया कि 29 जून को नबी करीम थाना क्षेत्र के आर्य नगर, पहाड़गंज स्थित एक निजी बिल्डर के कार्यालय में एक हथियारबंद युवक पहुंचा। उसने बिल्डर से 30 लाख रुपये की रंगदारी मांगी और तत्काल पांच लाख रुपये देने का दबाव बनाया। आरोपित ने धमकी दी कि उसके साथी आसपास मौजूद हैं और रकम नहीं देने पर अंजाम भुगतना पड़ेगा। जब बिल्डर ने पैसे देने से इनकार किया तो आरोपित ने जान से मारने की नीयत से गोली चला दी और मौके से फरार हो गया। घटना के बाद नबी करीम थाने में भारतीय न्याय संहिता और आर्म्स एक्ट की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसीपी पहाड़गंज सौरभ ए. नरेंद्र की निगरानी में नबी करीम थाना और सेंट्रल जिले की स्पेशल स्टाफ की कई टीमें गठित की गईं। पुलिस ने घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर), इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, होटल रिकॉर्ड और मुखबिरों से मिली सूचनाओं का विश्लेषण किया। जांच के दौरान सबसे पहले विशाल भाटी उर्फ भांजा को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में उसने पूरे षड्यंत्र का खुलासा कर दिया। इसके बाद पुलिस को पता चला कि यह वारदात एक अंतरराज्यीय गैंग और स्थानीय लोगों की मिलीभगत से अंजाम दी गई थी।
स्थानीय बिल्डर और होटल कारोबारी ने दिया था गैंग का साथ
जांच में सामने आया कि पवन कुमार उर्फ पवन चेतली, जो खुद स्थानीय बिल्डर और होटल कारोबारी है, तथा उसका साथी राजेश सचदेवा उर्फ सोनू मोटा इस साजिश के अहम किरदार थे। दोनों ने गैंग के सदस्यों के ठहरने की व्यवस्था कराई, बैठकों के लिए होटल उपलब्ध कराया और शिकायतकर्ता तथा उसके परिवार की जानकारी आरोपितों तक पहुंचाई। पुलिस के अनुसार, पवन चेतली का उद्देश्य प्रतिद्वंद्वी बिल्डर पर दबाव बनाकर अपना कारोबारी प्रभाव बढ़ाना था, जबकि मुख्य आरोपी पवन कुमार उर्फ पवन पहलवान पहाड़गंज इलाके में बिल्डरों और कारोबारियों के बीच खौफ पैदा कर खुद को बड़ा रंगदार स्थापित करना चाहता था। जांच में यह भी सामने आया कि शिकायतकर्ता के बेटे को आसान निशाना मानते हुए उसी के जरिए पूरे परिवार पर दबाव बनाने की योजना बनाई गई थी।
कोलकाता से दबोचा गया मुख्य साजिशकर्ता
घटना के बाद एक अन्य मुख्य आरोपित शक्ति सिंह दिल्ली छोड़कर कोलकाता भाग गया था। दिल्ली पुलिस की संयुक्त टीम ने वहां पहुंचकर उसे गिरफ्तार किया और ट्रांजिट रिमांड पर दिल्ली लेकर आई। जांच में पता चला कि शक्ति सिंह गौतमबुद्ध नगर के इकोटेक-1 थाने का हिस्ट्रीशीटर है और उसके खिलाफ दिल्ली में चोरी, सेंधमारी और चोरी का सामान रखने समेत 13 आपराधिक मामले दर्ज हैं।
इंस्टाग्राम पर पुलिस को दे रहा था चुनौती
मुख्य शूटर पवन पहलवान लगातार फरार चल रहा था। पुलिस के अनुसार, वह वारदात में इस्तेमाल हथियार के साथ अपने वीडियो इंस्टाग्राम पर पोस्ट कर रहा था। उसने फायरिंग की खबरें भी सोशल मीडिया पर साझा कीं और खुलेआम पुलिस को चुनौती देते हुए शिकायतकर्ता को आगे भी नुकसान पहुंचाने की धमकी दी। इन पोस्ट के जरिए वह इलाके के बिल्डरों और कारोबारियों में दहशत फैलाना चाहता था। मुखबिर से सूचना मिलने पर स्पेशल स्टाफ की टीम आईपी एस्टेट स्थित कब्रिस्तान के पास पहुंची। पुलिस का दावा है कि वहां आरोपित ने गिरफ्तारी से बचने के लिए पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने आत्मरक्षा में गोली चलाई, जिससे पवन पहलवान के दोनों पैरों में गोली लगी। उसे मौके पर ही गिरफ्तार कर अस्पताल में भर्ती कराया गया। इस मुठभेड़ के संबंध में आईपी एस्टेट थाने में अलग से मामला दर्ज किया गया है। पवन पहलवान के कब्जे से एक अत्याधुनिक पिस्टल, दो जिंदा कारतूस, तीन खोखे और एक चोरी की मोटरसाइकिल बरामद की गई। जांच में बाइक दिल्ली के मधु विहार थाना क्षेत्र से चोरी की निकली। अब तक गिरफ्तार आरोपियों में पवन कुमार उर्फ पवन पहलवान, शक्ति सिंह, विशाल भाटी उर्फ भांजा, पवन कुमार उर्फ पवन चेतली और राजेश सचदेवा उर्फ सोनू मोटा शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, तीन आरोपित का पहले से आपराधिक रिकॉर्ड भी है।
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