पाकिस्तान में महिलाओं की सुरक्षा पर उठे सवाल, ‘ऑनर किलिंग’ मामलों पर चिंता गहराई

इस्लामाबाद, 07 जून (हि.स.)। पाकिस्तान में महिलाओं के अधिकारों और उनकी सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि देश महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने और उनके अधिकारों की रक्षा करने के अपने संवैधानिक तथा नैतिक दायित्वों को प्रभावी ढंग से पूरा करने में विफल रहा है।

हाल ही में 25 वर्षीय गुलान भारो की कथित ‘ऑनर किलिंग’ ने इस मुद्दे को फिर सुर्खियों में ला दिया है। रिपोर्टों के अनुसार, मई के शुरुआती दिनों में उनकी हत्या कर दी गई। बताया गया कि उन्होंने पहले अपनी सुरक्षा को लेकर आशंका जताई थी और सुरक्षित आश्रय की मांग भी की थी, लेकिन बाद में पारिवारिक दबाव के चलते वह अपने परिजनों के साथ चली गईं।

पाकिस्तानी मीडिया में प्रकाशित विश्लेषणों के मुताबिक, महिलाओं के खिलाफ हिंसा रोकने के लिए कानून मौजूद हैं, लेकिन उनके प्रभावी क्रियान्वयन में कई बाधाएं हैं। सामाजिक रूढ़िवादिता, पितृसत्तात्मक सोच और संस्थागत कमजोरियां न्याय प्रक्रिया को प्रभावित करती हैं, जिससे पीड़ितों को समय पर न्याय नहीं मिल पाता।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि महिलाओं के खिलाफ अपराधों के मामलों में प्राथमिकी दर्ज करने में देरी, जांच प्रक्रिया की खामियां और न्यायिक कार्यवाही में लंबा समय लगना जैसी समस्याएं लगातार सामने आती रही हैं। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि इन चुनौतियों के कारण ऐसे अपराधों पर प्रभावी रोक लगाने में कठिनाई हो रही है।

मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि महिलाओं के खिलाफ हिंसा और तथाकथित ‘ऑनर किलिंग’ जैसी घटनाओं को रोकने के लिए केवल कानून बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके सख्त और निष्पक्ष क्रियान्वयन को भी सुनिश्चित करना होगा।

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