रामगढ़ महोत्सव 2026 : दिल्ली की रामलीला, कवि सम्मेलन और 'जटायु मोक्ष' की प्रस्तुति ने दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध

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अम्बिकापुर, 29 जून (हि.स.)। सरगुजा अंचल की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और साहित्यिक विरासत को समर्पित दो दिवसीय 'रामगढ़ महोत्सव-2026' का शानदार आगाज हुआ। महोत्सव के पहले दिन संस्कृति, साहित्य और लोककला का एक अद्भुत संगम देखने को मिला, जिसने आयोजन में पहुंचे दर्शकों का मन मोह लिया।

नई दिल्ली के ख्याति प्राप्त कलाकारों द्वारा प्रस्तुत भव्य रामलीला, कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय उदयपुर की छात्राओं की 'जटायु मोक्ष' नृत्य-नाटिका और ओजस्वी कवि सम्मेलन इस प्रथम दिवस के मुख्य आकर्षण रहे।

उत्सव की शुरुआत में नई दिल्ली से आए कलाकारों ने भगवान श्रीराम के जीवन प्रसंगों का अत्यंत प्रभावशाली मंचन कर दर्शकों को त्रेतायुग की जीवंत अनुभूति कराई। मर्यादा पुरुषोत्तम के आदर्श जीवन, धर्म, सत्य, त्याग और कर्तव्यपरायणता को सशक्त अभिनय, प्रभावी संवाद, आकर्षक वेशभूषा और मधुर संगीत के माध्यम से मंच पर उतारा गया। इस भव्य प्रस्तुति के दौरान पूरा परिसर दर्शकों की करतल ध्वनि से गुंजायमान हो उठा।

इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय, उदयपुर की बालिकाओं ने 'जटायु मोक्ष' पर आधारित एक संवेदनशील और भावपूर्ण नृत्य-नाटिका प्रस्तुत की। भगवान श्रीराम और पक्षीराज जटायु के मार्मिक प्रसंग को छात्राओं ने अपनी उत्कृष्ट आंगिक अभिव्यक्ति, पारंपरिक परिधान और सुमुधुर संगीत के तालमेल से साकार कर दिया। इस जीवंत अभिनय ने वहाँ मौजूद दर्शकों की आँखें नम कर दीं। बालिकाओं के इस अद्भुत हुनर और आत्मविश्वास की हर तरफ सराहना की गई।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बाद महोत्सव का मंच प्रतिष्ठित कवियों के नाम रहा। इस कवि सम्मेलन में देश के जाने-माने रचनाकारों ने ओज, वीर, श्रृंगार, हास्य-व्यंग्य और समसामयिक विषयों पर अपनी बेहतरीन कविताओं का पाठ किया। जहाँ एक ओर राष्ट्रभक्ति, भारतीय संस्कृति और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी कविताओं ने श्रोताओं के दिलों को छुआ, वहीं दूसरी ओर हास्य-व्यंग्य के बाणों ने पूरे माहौल को ठहाकों से भर दिया। दमदार काव्य पाठ पर दर्शकों ने जमकर तालियां बजाकर कवियों का उत्साहवर्धन किया।

मुख्य आयोजनों के साथ-साथ स्थानीय एवं क्षेत्रीय कलाकारों द्वारा प्रस्तुत सरगुजिहा लोकनृत्य, करमा नृत्य, स्वागत गीत और पारंपरिक लोकगीतों ने भी महोत्सव की भव्यता में चार चांद लगाए। इन प्रस्तुतियों के जरिए सरगुजा की समृद्ध लोक संस्कृति और परंपराओं का सुंदर प्रदर्शन देखने को मिला। गौरतलब है कि रामगढ़ महोत्सव का मुख्य उद्देश्य सरगुजा अंचल की ऐतिहासिक धरोहर और साहित्यिक परंपरा को राष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान दिलाना तथा युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ना है। महोत्सव के पहले दिन के इस सफल और भव्य आयोजन ने इस उद्देश्य को पूरी तरह सार्थक कर दिखाया।

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