मुंबई, 01जुलाई ( हि.स.) । यह साफ़ है कि ठाणे में इस साल बरसात काफी देरी से आई है साथ ही पिछले साल के मुकाबले इस साल ठाणे शहर में बारिश में काफ़ी कमी आई है। ठाणे म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के आपदा प्रबंधन विभाग के डेटा के मुताबिक, आज1 जुलाई दोपहर तक शहर में 483 मिली मीटर बारिश रिकॉर्ड की गई है, जबकि पिछले साल (2025) 820.24 मिलीमीटर बारिश हुई थी। यानी, सिर्फ़ एक साल में बारिश में लगभग 41 प्रतिशत की कमी आई है। बदलते मॉनसून के पृष्ठभूमि में, यह कमी ठाणे की जल सुरक्षा के लिए एक चेतावनी का संकेत मानी जा रही है।
मौसम विशेषज्ञ के मुताबिक, इक्वेटोरियल पैसिफिक ओशन ( भूमध्यसागरीय )में एल नीनो जैसी मौसमी घटनाएं भारतीय मॉनसून पर असर डालती हैं। हालांकि, पिछले कुछ सालों में ठाणे शहर में तेज़ी से बढ़ते शहरीकरण, कंक्रीटिंग, हरे-भरे इलाकों में कमी, कुदरती नालों और पानी के रास्तों पर कब्ज़े की वजह से बारिश का लोकल पैटर्न भी बदल रहा है। इस वजह से, कुछ घंटों में भारी बारिश, और फिर कई दिनों तक बारिश न होना लगातार देखा जा रहा है।
खास बात यह है कि ठाणे को झीलों का शहर कहा जाता है। शहर की झीलें, खाड़ियां, नदियां और कुदरती पानी के रास्ते बारिश का पानी जमा करने और ग्राउंडवॉटर को रिचार्ज करने के लिए बहुत ज़रूरी हैं। हालांकि, बढ़ते शहरीकरण और कुदरती पानी के सोर्स पर दबाव इस सिस्टम पर दबाव डाल रहा है। विशेषज्ञ भविष्य में पानी के स्त्रोत पर असर पड़ने की संभावना जता रहे हैं क्योंकि कम समय में भारी बारिश का पानी बड़ी मात्रा में समुद्र की ओर बह रहा है।
मुंबई के पर्यावरणविद डॉ प्रशांत के मतानुसार -ठाणे शहर को अब न सिर्फ़ सैलाब नियंत्रण पर ध्यान देने की ज़रूरत है, बल्कि बारिश के पानी के बचाव, झीलों के बचाव, देसी पेड़ लगाने, कुदरती नालों को कब्ज़े से बचाने और जलवायु परिवर्तन के हिसाब से सतत शहरी योजना पर भी ध्यान देने की ज़रूरत है। ये उपाय न सिर्फ़ पर्यावरण के लिए बल्कि भविष्य की पानी की सुरक्षा के लिए भी ज़रूरी होंगे।
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