समाज के सभी वर्गों के साथ सह्रदयता रखना ही समरसता: रमेश पतंगे

पद्मश्री रमेश पतंगे

- विश्व हिन्दू अकादमिक की हिन्दुत्व की शाश्वत प्रासंगिकता विषयक संगाेष्ठी संपन्न- भारत के उत्थान में नाथ सम्प्रदाय का बड़ा योगदान: पद्मश्री रमेश

लखनऊ, 20 जनवरी (हि.स.)। विश्व हिन्दू परिषद के आयाम विश्व हिन्दू अकादमिक संगठन की ओर से मंगलवार को लखनऊ विश्वविद्यालय के मालवीय सभागार में हिन्दुत्व की शाश्वत प्रासंगिकता विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस अवसर पर सामाजिक समरसता पर अपने विचार रखते हुए पद्मश्री रमेश पतंगे ने कहा ​कि समाज के सभी वर्गों के साथ सह्रदयता रखना ही सामाजिक समरसता है। समाज में सबके साथ हमारा व्यवहार समता का समानता का समरसता का होना चाहिए। किसी भी प्रकार से सामने वाले को यह महसूस नहीं होना चाहिए कि मेरी जाति व रंग रूप के कारण हमारे साथ अलग व्यवहार हो रहा है। क्षमता की दृ​ष्टि से अलग—अलग हो सकते हैं। रंग रूप स्त्री भेद जाति पांत का भेद नहीं होना चाहिए। कानून के सामने सब समान हैं। सबको अवसर की समानता होनी चाहिए।

पद्मश्री रमेश पतंगे ने कहा कि हमारे पूर्वजों ने स्वार्थ के आधार पर अस्पृश्यता को धर्म के साथ जोड़ दिया। धर्म के नाम पर कुछ भी करना यह हिन्दू समाज का स्वभाव बन गया है। चारित्रय सम्पन्न ज्ञानी व्यक्ति की समाज को आवश्यकता होती है। जाति पांत की बहुमंजिली इमारत को ध्वस्त करने की जरूरत है। समाज की विषमता के निराकरण के लिए प्रयास करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि भारत के उत्थान में नाथ सम्प्रदाय का बड़ा योगदान है। आज जो अभिमान से कहते हैं कि मैं हिन्दू हूं इसका श्रेय नाथ सम्प्रदाय को जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारतीय समाज की शक्ति उसकी विविधता में निहित एकता है। आपसी सहयोग, संवाद और समान दायित्व की भावना से ही सामाजिक समरसता सुदृढ़ होती है, जो राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है।

रमेश पतंगेेेेेेे ने कहा संघ का विचार है जो तत्वज्ञान ​व्यवहार में नहीं आता उसे बांझ समझना चाहिए। सब के साथ हमारा व्यवहार समरसता का होना चाहिए। हर व्यक्ति सम्मान चाहता है। परस्परानुकूल समान व्यवहार करने की आदत सबको होनी चाहिए। कर्म से कोई छोटा बड़ा नहीं होता। सबका सत्कार सम्मान होना चाहिए। भारत के सभी लोगों में समरसता और समान भातृत्व की भावना का निर्माण करें जो धर्म भाषा और वर्ग से परे हो। वर्ग पर आधारित सभी भेदभाव से परे हो। यह संवैधानिक आदेश है।

विश्व हिन्दू अकादमिक संगठन के राष्ट्रीय समन्वयक प्रो. नचिकेता तिवारी ने संगठन की भूमिका स्पष्ट करते हुए कहा कि गुरुकुल परंपरा में ज्ञान और संस्कार साथ-साथ दिए जाते थे; आज उच्च शिक्षा में भारतीय ज्ञान परंपरा को पुनः स्थापित करना समय की आवश्यकता है। विशिष्ट अतिथि विश्व हिन्दू परिषद के क्षेत्र संगठन मंत्री गजेन्द्र सिंह ने कहा कि योग, संस्कृत और भारतीय पर्वों के प्रति युवाओं की बढ़ती रुचि यह प्रमाण है कि सांस्कृतिक चेतना स्वतः समाज में पुनर्जीवित हो रही है।

अध्यक्षीय उद्बोधन में लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जय प्रकाश सैनी ने नई शिक्षा नीति में भारतीय भाषाओं और ज्ञान परंपरा को शामिल किए जाने को हिन्दुत्व की समावेशी भावना का आधुनिक उदाहरण बताया। विहिप के प्रान्त संगठन मंत्री विजय प्रताप ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मेलन केवल एक अकादमिक आयोजन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पुनर्जागरण की साझा यात्रा है।

हिन्दुस्थान समाचार / बृजनंदन

   

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