यादगिरिगुट्टा देवस्थानम बोर्ड नियुक्तियों पर कांग्रेस में बढ़ा विवाद, विधायक राजगोपाल रेड्डी ने मुख्यमंत्री की कार्यशैली पर उठाए सवाल
- DSS Admin
- Jul 01, 2026
हैदराबाद, 01 जुलाई (हि.स.)। तेलंगाना के प्रसिद्ध यादगिरिगुट्टा देवस्थानम बोर्ड के सदस्यों की नियुक्तियों को लेकर कांग्रेस में नया विवाद खड़ा हो गया है। मुनुगोडु से कांग्रेस विधायक कोमटिरेड्डी राजगोपाल रेड्डी ने मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी की कार्यशैली और नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस मामले में जनप्रतिनिधियों से कोई राय नहीं ली गई। उनका आरोप है कि बोर्ड के गठन में स्थानीय प्रतिनिधियों की अनदेखी की गई, जिससे पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ सकता है।
राजगोपाल रेड्डी ने कहा कि उनका विधानसभा क्षेत्र यादाद्रि-भुवनगिरि जिले के अंतर्गत आता है, लेकिन उन्हें यादगिरिगुट्टा देवस्थानम बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज के गठन की कोई जानकारी नहीं दी गई। उन्होंने कहा, यह पूरी तरह एकतरफा फैसला है। यदि मुझसे चर्चा की जाती तो मैं कम से कम अपने निर्वाचन क्षेत्र से एक सदस्य को बोर्ड में शामिल कराने का प्रयास करता।
उन्होंने कहा कि अध्यक्ष की नियुक्ति पर वह कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते, लेकिन बोर्ड के सदस्यों की नियुक्ति पर संबंधित जनप्रतिनिधियों से विचार-विमर्श होना चाहिए था। उनके अनुसार, इस प्रकार के फैसले पार्टी संगठन के भीतर समन्वय को कमजोर करते हैं और कार्यकर्ताओं व नेताओं में असंतोष पैदा करते हैं।
राजगोपाल रेड्डी ने कहा कि वह मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के संपर्क में रहते हैं और कांग्रेस नेता राहुल गांधी से भी उनकी मुलाकात होती रही है। उन्होंने कहा कि वह पार्टी की गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं और ऐसे मामलों में उन्हें भी अपनी राय रखने का अवसर मिलना चाहिए था। उनके अनुसार, नियुक्ति प्रक्रिया में परामर्श की कमी उचित नहीं है।
उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस में कई वरिष्ठ नेता हैं, जिन्हें संगठन चलाने और नियुक्तियों से जुड़े निर्णय लेने का लंबा अनुभव है। ऐसे नेताओं के अनुभव का लाभ उठाया जाना चाहिए था। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या पार्टी नेतृत्व इन बुनियादी बातों पर ध्यान नहीं दे रहा है।
राजगोपाल रेड्डी ने तेलंगाना कांग्रेस की मौजूदा स्थिति पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पार्टी में बड़ी संख्या में नए नेताओं के शामिल होने के बाद लंबे समय से कांग्रेस से जुड़े नेताओं की उपेक्षा हो रही है। उनके अनुसार, जिन नेताओं और कार्यकर्ताओं ने वर्षों तक पार्टी और तेलंगाना आंदोलन के लिए काम किया, वे अब निर्णय प्रक्रिया से दूर होते जा रहे हैं।
गौरतलब है कि राजगोपाल रेड्डी इससे पहले भी मुख्यमंत्री की कार्यशैली को लेकर सार्वजनिक रूप से अपनी नाराजगी जता चुके हैं। उन्होंने 'रायथु भरोसा' योजना के लाभ वितरण में देरी सहित कई मुद्दों पर सरकार की आलोचना की है। हाल ही में नलगोंडा में आयोजित कांग्रेस की जनसभा में भी उन्होंने हिस्सा नहीं लिया था।
इस संबंध में उन्होंने कहा, मेरा मुख्यमंत्री की नलगोंडा सभा में जाने का मन नहीं था। उनके काम करने का तरीका मुझे पसंद नहीं है। सरकार को दिखावे या अनावश्यक तामझाम के बजाय लोगों के लिए प्रभावी ढंग से काम करना चाहिए।
राजगोपाल रेड्डी के इन बयानों को तेलंगाना कांग्रेस में संगठनात्मक असंतोष और नियुक्तियों को लेकर उभर रहे मतभेदों के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, मुख्यमंत्री या प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व की ओर से इस मुद्दे पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।--------------

