तोतापुरी आम के किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए केन्द्र ने गठित की समिति

नई दिल्ली, 03 जुलाई (हि.स.)। तोतापुरी आम की किस्म की कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट हुई है, जिससे आम उत्पादक किसानों में चिंता और असंतोष का माहौल है। इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्रालय ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के माध्यम से वैज्ञानिकों एवं संबंधित संस्थाओं के प्रतिनिधियों की एक उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया है। आईसीएआर द्वारा गठित विशेषज्ञ समिति में अध्यक्ष डॉ. टी. दमोदरन को बनाया गया है जो आईसीएआर–सीआईएसएच लखनऊ में निदेशक हैं। इसके साथ सदस्यों में बेंगलुरू के फ्रूट क्रॉप्स, आईसीएआर–आईआईएचआर के प्रमुख डॉ. एम. शंकरन, लखनऊ के आईसीएआर–सीआईएसएच के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. एच.एस. सिंह, कॉलेज ऑफ हॉर्टिकल्चर, अनंत राजपेटा के प्रोफेसर डॉ. डी. श्रीनिवास रेड्डी, वाईएसआर हॉर्टिकल्चर यूनिवर्सिटी, आंध्र प्रदेश के निदेशक (उद्यानिकी), आंध्र प्रदेश अथवा उनके नामित प्रतिनिधि सदस्य शामिल है। यह समिति अगले 10 दिनों के भीतर आंध्र प्रदेश के प्रमुख तोतापुरी आम उत्पादक क्षेत्रों का दौरा कर जमीनी स्थिति का जायजा लेगी औऱ अपनी रिपोर्ट कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को सौंपेगी।

उल्लेखनीय है कि केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आंध्र प्रदेश के हालिया दौरे के दौरान तोतापुरी आम उत्पादक किसानों के साथ व्यापक संवाद कर उनकी समस्याओं को गंभीरता से लिया। किसानों ने अवगत कराया कि प्रसंस्करण के लिए बड़े पैमाने पर उगाई जाने वाली तोतापुरी आम किस्म की कीमतों में हाल के समय में उल्लेखनीय गिरावट आई है, जिसके कारण राज्य के आम उत्पादक किसानों को गंभीर आर्थिक संकट और असमंजस की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।

कृषि मंत्रालय ने जारी अपने एक बयान में बताया कि केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने समिति को निर्देश दिए गए हैं कि वह अगले 10 दिनों के भीतर आंध्र प्रदेश के प्रमुख तोतापुरी आम उत्पादक क्षेत्रों का दौरा कर जमीनी स्थिति का प्रत्यक्ष आकलन करे। क्षेत्रीय भ्रमण के दौरान समिति किसानों, प्रसंस्करण उद्योगों, निर्यातकों, राज्य सरकार के उद्यानिकी अधिकारियों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) और अन्य संबंधित हितधारकों से विस्तृत चर्चा करें। इन चर्चाओं और क्षेत्रीय आंकड़ों के आधार पर समिति कीमतों में हालिया गिरावट के कारणों का वैज्ञानिक और आर्थिक विश्लेषण करेगी, ताकि नीति–निर्माण के लिए तथ्यपरक आधार उपलब्ध हो सके।

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