सुपवा में सिखा रहे फिल्मों के सेट बनाने का हुनर

बॉलीवुड के प्रॉडक्शन डिजाइनर राहुल बाला ले रहे वर्कशॉप

फिल्म एवं टेलीविजन के छात्रों को सिखा रहे बारीकियां

रोहतक, 19 मई (हि.स.)। दादा लख्मी चंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ परफॉर्मिंग एंड विजुअल आर्ट्स (डीएलसीसुपवा) के छात्र इन दिनों फिल्मों के सेट तैयार करने की विधा सीख रहे हैं। इसके लिए बॉलीवुड के प्रॉडक्शन डिजाइनर राहुल बाला सुपवा आए हैं, जो फिल्म एवं टेलीविजन फैकेल्टी के छात्रों की वर्कशॉप ले रहे हैं। वर्कशॉप के दौरान वे सेट तैयार करने के दौरान ध्यान रखी जाने वाली बारीरियों से छात्रों को अवगत करा रहे हैं। फिल्म एवं टेलीविजन फैकेल्टी के एफसी महेश टीपी बताते हैं कि राहुल बाला एफटीआईआई, पुणे और कॉलेज ऑफ आर्ट, दिल्ली से फोटोग्राफी व प्रॉडक्शन डिजाइन में प्रशिक्षित हैं। वे सोहम शाह फिल्म्स की चमकीला, स्टेज ओटीटी की वेब सीरीज अखाड़ा, इम्तियाज अली द्वारा प्रस्तुत और जीना अभी बाकी है, में प्रॉडक्शन डिजाइनर के तौर पर कार्य कर चुके हैं। बच्चों की शॉर्ट फिल्म दूरबीन का सह-निर्माण और शूट भी उन्होंने ही किया था, जिसने एनडीएफएफ 2021 में सर्वश्रेष्ठ सिनेमेटोग्राफी पुरस्कार हासिल किया था।

कुलगुरु डॉ अमित आर्य ने कहा कि फिल्मों में दिखने वाली भव्यता सिर्फ कलाकारों या लोकेशन की देन नहीं होती, बल्कि उसके पीछे एक पूरी टीम की महीनों की मेहनत छिपी होती है। जब भी आप किसी ऐतिहासिक या भव्य फिल्म को देखते हैं तो उसके सेट आपको एक अलग ही दुनिया में ले जाते हैं। लेकिन यह जादू अचानक नहीं बनता, बल्कि इसके पीछे एक सुनियोजित और बेहद तकनीकी प्रक्रिया होती है।

बॉलीवुड के प्रॉडक्शन डिजाइनर राहुल बाला ने छात्रों को बताया कि फिल्म का सेट तैयार करने की जिम्मेदारी प्रॉडक्शन डिजाइनर व आर्ट डायरेक्टर की होती है। ये लोग निर्देशक के विजन को समझकर पहले ब्लूप्रिंट तैयार करते हैं। इसमें हर छोटी-बड़ी डिटेल शामिल होती है, जैसे महल का आकार, दरवाजों की डिजाइन, रंगों का संयोजन और यहां तक कि दीवारों की बनावट कैसी रहेगी। इसके बाद लकड़ी, फाइबर, प्लास्टर और अन्य विशेष सामग्री की मदद से सेट को धीरे-धीरे खड़ा किया जाता है। कई बार सेट इतने वास्तविक बनाए जाते हैं कि दर्शक उन्हें असली लोकेशन समझ बैठते हैं। उन्होंने कहा कि सिनेमा एक विजुअल आर्ट है, जहां हर फ्रेम को खास बनाने के लिए बारीकी से काम किया जाता है। यही वजह है कि जब दर्शक इन सेट में शूट हुई फिल्मों को देखते हैं तो उन्हें सिर्फ कहानी ही नहीं, बल्कि एक भव्य अनुभव भी मिलता है जो लंबे समय तक याद रहता है।

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