उपराज्यपाल ने स्कूल शिक्षा विभाग के एक दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यक्रम में लिया भाग
- DSS Admin
- Jul 02, 2026
जम्मू, 2 जुलाई (हि.स.) उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने आज भारती एयरटेल फाउंडेशन, स्टेट काउंसिल ऑफ़ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (जम्मू कश्मीर ) और स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित 'एक दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यक्रम' में हिस्सा लिया।
यह कार्यक्रम इन तीनों संस्थाओं द्वारा मिलकर तैयार किए गए शिक्षण संसाधनों को लॉन्च करने का एक औपचारिक मंच था। इसका मकसद शिक्षकों की पेशेवर क्षमता को मजबूत करना और पूरे केंद्र शासित प्रदेश में स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाना था।
इस मौके पर उपराज्यपाल ने कहा कि यह पहल एक सामूहिक संकल्प है और यह इस बुनियादी सच्चाई पर आधारित है कि जब हम शिक्षकों को सशक्त बनाते हैं तो हम अपने छात्रों में आत्मविश्वास जगाते हैं। जब शिक्षक सशक्त होते हैं तो छात्रों में आत्मविश्वास आता है। जब स्कूल मजबूत होते हैं तो समाज अधिक लचीला बनता है और जब शिक्षा सही दिशा में आगे बढ़ती है तो जम्मू-कश्मीर और देश एक उज्जवल, सुरक्षित और अधिक समृद्ध भविष्य की ओर बढ़ते हैं।
हमें याद रखना चाहिए कि शिक्षा का अंतिम उद्देश्य बदलाव लाना है। जब सीखना असल ज़िंदगी के अनुभवों से जुड़ता है तो यह पीढ़ीगत बदलाव लाता है। शिक्षा की सबसे बड़ी ताकत परीक्षा के नतीजों में नहीं बल्कि जीवन बदलने की उसकी क्षमता में है। एक समर्पित शिक्षक किस्मत संवारता है। उपराज्यपाल ने कहा कि मैं चाहता हूं कि जम्मू-कश्मीर के स्कूल इस पहलू पर ध्यान दें और जीवन-निर्माण की प्रयोगशालाएं बनें ।
यह एक दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यक्रम व्यापक नशा-मुक्त जम्मू-कश्मीर अभियान से भी जुड़ा है। इसका मकसद शिक्षण विधियों में सुधार करना और छात्रों को आज के युवाओं के सामने आने वाली चुनौतियों से बचाना है। उपराज्यपाल ने कहा कि नशीली दवाओं के सेवन, मानसिक तनाव, सामाजिक दबाव, डिजिटल दुनिया के खतरों और बदलती जीवनशैली के बढ़ते चलन ने स्कूल की भूमिका को पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को आधुनिक उपकरण और प्रशिक्षण दिए जा रहे हैं ताकि वे छात्रों के व्यक्तित्व को निखारने और उन्हें जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए सशक्त बनाने में मदद कर सकें। हर छात्र अनोखी प्रतिभा के साथ पैदा होता है। हमारा कर्तव्य है कि हम हर बच्चे की प्रतिभा को पहचानें और उसे आगे बढ़ने के लिए संसाधन और उपकरण दें। मैं हर शिक्षक से पूरी जिम्मेदारी के साथ कहता हूं कि वे याद रखें कि शिक्षा केवल प्रतिस्पर्धा नहीं बल्कि आत्म-विकास की एक निरंतर यात्रा है। इस यात्रा में आपको हर छात्र की खासियत का सम्मान करना चाहिए और उसे प्रोत्साहित करना चाहिए।
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