एक ही है परमेश्वर, वेदों का यही अटल सत्य-स्वामी राम स्वरूप जी

There is only one Supreme God; this is the unshakeable truth of the Vedas — Swami Ram Swaroop Ji.


कठुआ, 12 जून । वेद मन्दिर योल में चल रहे 78 दिवसीय चारों वेदों के महायज्ञानुष्ठान के 62वें दिन श्रद्धा और आध्यात्मिकता का विशेष संगम देखने को मिला। इस अवसर पर स्वामी राम स्वरूप जी योगाचार्य ने श्रद्धालुओं को वेदों का गूढ़ ज्ञान देते हुए सच्चे आध्यात्मिक मार्ग की ओर प्रेरित किया।

स्वामी जी ने अपने प्रवचन में कहा कि मनुष्य को ईश्वर ने बुद्धि इसलिए दी है ताकि वह हर विषय पर चिंतन-मनन कर सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी के कहने मात्र से उसे परमेश्वर या गुरु मान लेना उचित नहीं है। सत्य को स्वीकार करने के लिए वेदों का प्रमाण आवश्यक है। उन्होंने योग शास्त्र के महान ऋषि पतंजलि के सूत्र 1/7 का उल्लेख करते हुए बताया कि किसी भी विचार को सत्य सिद्ध करने के लिए प्रमाण आवश्यक होता है और वेद ही सर्वोच्च प्रमाण हैं। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि आज समाज में यह धारणा प्रचलित हो गई है कि परमेश्वर के अनेक रूप हैं और कोई भी व्यक्ति अपनी इच्छा अनुसार किसी भी रूप में पूजा कर सकता है।

स्वामी जी ने इस विचार का खंडन करते हुए कहा कि चारों वेदों में कहीं भी इस प्रकार का कोई उल्लेख नहीं मिलता। उन्होंने अथर्ववेद (काण्ड 13, सूक्त 4) सहित अन्य वेदों का संदर्भ देते हुए बताया कि वेदों का स्पष्ट संदेश है परमेश्वर एक है, न वह अनेक था, न है और न ही कभी होगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में विभिन्न मतों और मान्यताओं के कारण मनुष्य वैदिक सत्य मार्ग से भटक गया है और ईश्वर के अतिरिक्त अनेक रूपों की पूजा प्रारंभ हो गई है, जो प्राचीन वैदिक परंपरा में नहीं थी।

स्वामी राम स्वरूप जी ने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे वेदों का अध्ययन कर पहले परमेश्वर के वास्तविक स्वरूप को समझें और फिर उसी के अनुसार उपासना करें। उन्होंने जोर देकर कहा कि अनादि काल से चली आ रही वेदसम्मत उपासना ही सच्चा और कल्याणकारी मार्ग है। यज्ञस्थल पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने इस आध्यात्मिक प्रवचन को अत्यंत ध्यानपूर्वक सुना और वेदों के बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।

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