योगी सरकार शिक्षा में सुधार और कक्षा-कक्षीय व्यवहार में बदलाव लाने के लिए प्रतिबद्ध : पार्थ सारथी सेन शर्मा
- DSS Admin
- Jun 30, 2026
लखनऊ , 30 जून (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव, बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने मंगलवार को राजधानी लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में 'टीएलपीएस रिपोर्ट-2025' का विमोचन किया और इस अवसर पर 'पॉलिसी टू प्रैक्टिस' संवाद में शिक्षकों के साथ सीधे बातचीत की गई।
इस अवसर पर पार्थ सारथी सेन शर्मा ने स्कूल चलो अभियान, नियमित उपस्थिति, कैच-अप लर्निंग, निपुण लक्ष्य और प्रभावी शिक्षण पर स्पष्ट निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा सुधार केवल नीतियां बनाने से संभव नहीं होगा, बल्कि प्रत्येक शिक्षक द्वारा कक्षा-कक्ष में अपनाई जाने वाली शिक्षण पद्धति से वास्तविक परिवर्तन आएगा। उन्होंने कहा कि किसी भी शिक्षण प्रक्रिया का सबसे महत्वपूर्ण आधार बच्चों का जुड़ाव है। शिक्षकों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार नवाचार अपनाते हुए प्रत्येक बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचानी होगी। एक जुलाई से शुरू हो रहे स्कूल चलो अभियान में तीन साल से अधिक उम्र के किसी भी बच्चे को बाल वाटिका से बाहर नहीं रहना चाहिए और छह साल से अधिक उम्र के किसी भी बच्चे को स्कूल से बाहर नहीं रहना चाहिए।
कक्षा 05 से 06, 08 से 09 और 10 से 11 में नामांकन सुनिश्चित करने के लिए संबंधित शिक्षकों को जिम्मेदारी लेनी चाहिए। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए बच्चों की नियमित उपस्थिति आवश्यक है। यदि कोई बच्चा लगातार अनुपस्थित रहता है, तो उसके माता-पिता से संपर्क करके उसे स्कूल से जोड़ने का प्रयास किया जाना चाहिए।
सत्र की शुरुआत से ही कैच-अप लर्निंग को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, ताकि सीखने में अंतर वाले बच्चों को अतिरिक्त शैक्षणिक सहायता मिल सके। निपुण उत्तर प्रदेश का दायरा अब कक्षा 01 और 02 से बढ़ाकर कक्षा 03 से 05 तक किया जा रहा है। शिक्षकों को निपुण लक्ष्यों की नियमित समीक्षा करनी चाहिए, परिणामों का विश्लेषण करना चाहिए और उन्हें अभिभावकों के साथ साझा करना चाहिए। राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वेक्षण परख के निष्कर्षों के अनुसार, लेखन कौशल में सुधार की व्यापक आवश्यकता है। शिक्षकों को प्रतिदिन स्वतंत्र पठन और स्वतंत्र लेखन को बढ़ावा देना चाहिए।
बच्चों को अपने विचार स्वतंत्र रूप से लिखने का अवसर दिया जाना चाहिए, जिससे उनकी रचनात्मकता और आलोचनात्मक सोच का विकास हो सके। होलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जाना चाहिए और अभिभावकों के साथ नियमित रूप से जानकारी साझा की जानी चाहिए। विद्यालय प्रबंधन समिति और अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी शिक्षा सुधार का महत्वपूर्ण आधार है।
शिक्षक संकुल बैठकों को अनुभव साझा करने का मंच बनाया जाना चाहिए, जहां शिक्षक अपनी सफल शिक्षण विधियां, नवाचार और व्यावहारिक अनुभव साझा कर सकें। 15 जून को जारी विभागीय पत्र में उल्लिखित दस प्रमुख शिक्षण बिंदुओं पर प्रत्येक शिक्षक संकुल बैठक में विस्तार से चर्चा की जानी चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान आयोजित पैनल चर्चा में कक्षा-कक्षीय शिक्षण को मजबूत बनाने, दस प्रभावी शिक्षण अभ्यासों, सहायक पर्यवेक्षण, निपुण सूची एवं तालिका के प्रभावी उपयोग तथा मध्य स्तरीय शैक्षणिक नेतृत्व की भूमिका पर विशेषज्ञों ने विचार साझा किए। राष्ट्रीय एवं राज्य पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों ने विद्यालयों में किए गए नवाचारों, पठन अभियान तथा निपुण कार्यक्रम के सफल कार्यान्वयन के अनुभव भी साझा किए।
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