उप्र पुलिस महानिदेशक ने एक साल में किए कार्यों की गिनाई उपलब्धियां

लखनऊ, 01 जून (हि.स.)। काफी लंबे समय के बाद उत्तर प्रदेश को अपना स्थायी पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) मिल गया है। तकरीबन एक साल से कार्यवाहक डीजीपी का पद संभाल रहे आईपीएस राजीव कृष्ण को प्रदेश का पूर्णकालिक डीजीपी बनाया गया है। नियुक्ति के बाद उन्होंने सोमवार को पुलिस मुख्यालय में पत्रकार वार्ता की। उन्होंने 31 मई 2025 से 31 मई 2026 तक की यूपी पुलिस की उपलब्धियाँ और भविष्य की योजनाएं बताई हैं।

डीजीपी राजीव कृष्ण ने शासन के नेतृत्व एवं प्राथमिकताओं के अनुरूप पुलिस बल के लिए 10 प्रमुख प्राथमिकताएं निर्धारित की। इन प्राथमिकताओं ने पूरे वर्ष के कार्यों को स्पष्ट दिशा दी और पुलिसिंग को अधिक प्रभावी, जवाबदेह, तकनीक-सक्षम और नागरिक-केंद्रित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

डीजीपी ने पत्रकारों को बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में अपराधियों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई और न्यायालयों में मजबूत पैरवी के परिणामस्वरूप ऑपरेशन कन्विक्शन के अंतर्गत 93 प्रतिशत से अधिक दोषसिद्धि दर प्राप्त की गई। कुल 32,071 मामलों में न्यायालयों ने निर्णय दिया, जिनमें 29,911 मामलों में दोषसिद्धि हुई। इन मामलों में 42,681 अभियुक्तों को सजा दिलाई गई, जिनमें 18 मृत्युदंड और 3,340 आजीवन कारावास की सजाएं शामिल हैं। गैंगस्टर एक्ट के अंतर्गत 5,684 अपराधियों के विरुद्ध विधिक कार्रवाई की गई तथा धारा 14(1) के अंतर्गत लगभग 788.38 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियाँ जब्त की गईं।

डीजीपी ने बताया कि लूट के मामलों में 27.8 प्रतिशत, कुल चोरी के मामलों में 14.4 प्रतिशत तथा डकैती के मामलों में 11.1 प्रतिशत की कमी आई। हत्या, बलवा, नकबजनी जैसे अपराधों में भी गिरावट दर्ज की गई।

माफिया एवं संगठित अपराध के विरुद्ध कार्रवाई को लगातार प्रभावी बनाया गया। गैंगस्टर एक्ट के अंतर्गत 336 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की संपत्तियां जब्त, ध्वस्त अथवा अवैध कब्जे से मुक्त कराई गईं। प्रभावी पैरवी के माध्यम से 10 माफिया सरगनाओं और उनके 20 सहयोगियों को सजा दिलाई गई।

--महिला सशक्तिकरण, सुरक्षा एवं संरक्षण

उत्तर प्रदेश की महिला सुरक्षा के प्रतिबद्धता को जमीनी स्तर तक मजबूत करने के लिए मिशन शक्ति फेज 5.0 के अंतर्गत प्रदेश के प्रत्येक थाने में मिशन शक्ति केंद्रों को संस्थागत रूप दिया गया। प्रदेश के सभी थानों में मिशन शक्ति केन्द्र स्थापित किए गए हैं। वर्तमान में 1,647 थानों में महिला हेल्प डेस्क संचालित हैं, जिनके प्रभावी संचालन के लिए लगभग 13,500 कार्मिकों की नियुक्ति की गई है। महिला सुरक्षा, सम्मान एवं सशक्तिकरण से संबंधित कार्यों के लिए 40,000 से अधिक पुलिसकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। मिशन शक्ति केन्द्र स्थापित होने से तीन माह पूर्व ( 16 जून 25 से 15 सितम्बर 25 तक) व स्थापित होने के तीन माह पश्चात (16 सितम्बर 25 से 15 दिसम्बर 25 तक) के मध्य पूरे प्रदेश के महिला सम्बंधी अपराधों में उल्लेखनीय गिरावट आई है।

बलात्कार सम्बंधी प्रकरणों में करीब 33.92 प्रतिशत की कमी हुयी है। महिलाओं एवं बच्चियों के अपहरण सम्बंधी प्रकरणों में करीब 17.03 प्रतिशत की कमी, दहेज हत्या सम्बंधी प्रकरणों में करीब 12.96 प्रतिशत की, घरेलू हिंसा सम्बंधी प्रकरणों में करीब 9.54 प्रतिशत की कमी आयी है।

--जन शिकायतों का समाधान

जन शिकायतों के सुचारू निस्तारण को सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखा गया है। लगातार निगरानी, नियमित समीक्षा और प्रभावी फॉलो-अप के परिणामस्वरूप भारत सरकार के पोर्टल, मुख्यमंत्री हेल्पलाइन/पोर्टल और आईजीआरएस पर प्राप्त शिकायतों एवं लम्बित प्रकरणों में सम्मिलित रूप से 28 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।

--कानून व्यवस्था का प्रभावी संचालन

उत्तर प्रदेश की सुदृढ़ कानून व्यवस्था की प्राथमिकता के दृष्टिगत उपरोक्त अवधि में प्रदेश में सभी प्रमुख आयोजनों को शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित ढंग से सम्पन्न कराया गया। प्रयागराज में आयोजित माघ मेला 2026 लगभग 22 करोड़ श्रद्धालुओं की उपस्थिति के साथ सकुशल सम्पन्न हुआ। दीपावली, होली, ईद तथा विभिन्न धार्मिक जुलूसों एवं आयोजनों को बिना किसी गंभीर घटना के शांतिपूर्ण तरीके से सम्पन्न कराया गया। लगातार निगरानी, समयबद्ध समीक्षा और अद्यतन आकस्मिक योजनाओं के कारण पूरी अवधि में प्रदेश में कोई साम्प्रदायिक दंगा नहीं हुआ।

--साइबर अपराध नियंत्रण

उत्तर प्रदेश की प्राथमिकता के अनुरूप साइबर अपराधों पर सख्त नियंत्रण करने के लिए लखनऊ के कल्ली पश्चिम में समर्पित साइबर क्राइम कॉल सेंटर स्थापित किया गया। इसकी क्षमता 20 सीटों से बढ़ाकर 80 सीटों तक की गई है और इसे आगे 200 सीटों तक विस्तारित किए जाने की योजना है।

राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल पर कुल 400.66 करोड़ रुपये की धनराशि फ्रीज कराई गई। इसके अतिरिक्त 1.11 लाख मोबाइल नंबर तथा 1.22 लाख आईएमईआई ब्लॉक कराए गए। प्रतिबिंब पोर्टल और सीआईएआर अनुपालन में उत्तर प्रदेश ने देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया, जिसमें सीआईएआर अनुपालन 91 प्रतिशत रहा। साइबर प्रशिक्षण के क्षेत्र में भी उत्तर प्रदेश देश में प्रथम स्थान पर रहा। I4C CyTrain पोर्टल के माध्यम से 65,608 पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षित किया गया तथा 84,705 प्रमाणपत्र जारी किए गए। प्रत्येक जोन स्तर पर साइबर कमांडो की तैनाती की गई।

साइबर फ्रॉड में धनराशि को तत्काल रोकने के लिए साइबर धोखाधड़ी शमन केंद्र (सीएफएमसी) को संचालित किया गया, जिससे बैंकों के बीच त्वरित लियन/फ्रीज कार्रवाई संभव हुई। इसके परिणामस्वरूप साइबर फ्रॉड की धनराशि पर लियन प्रतिशत लगभग 18 प्रतिशत से बढ़कर 37 प्रतिशत हो गया।

--पुलिसिंग में तकनीक एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग

अपराध, अपराधियों और बीट पुलिसिंग को अधिक प्रभावी बनाने के लिए यक्ष एप की परिकल्पना की गई। इस ऐप का शुभारंभ मुख्यमंत्री ने दिसम्बर 2025 में किया था। इस ऐप के माध्यम से फरार अपराधियों की पहचान और ट्रैकिंग, जटिल आपराधिक मामलों के खुलासे, हिस्ट्रीशीटरों की निगरानी और फील्ड स्तर पर जवाबदेही को मजबूत करने में महत्वपूर्ण सहायता मिली है।

--प्रशिक्षण में 412 मास्टर ट्रेनर्स तैयार

उत्तर प्रदेश सरकार की प्राथमिकता के अनुरूप उत्तर प्रदेश पुलिस के प्रशिक्षण ढांचे को आधुनिक, परिणाम-केंद्रित और भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप बनाया गया। 60 हजार से अधिक नव-आरक्षियों को प्रशिक्षण दिया गया। इसके साथ ही नाइन ट्रेनिंग आफ ट्रेनर्स कार्यक्रमों के माध्यम से 412 मास्टर ट्रेनर्स तैयार किए गए।

नई न्याय संहिताओं—बीएनएस,बीएनएसएस और बीएसए पर 27 हजार से अधिक पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षित किया गया। प्रशिक्षण व्यवस्था में पारंपरिक पुलिसिंग कौशलों के साथ-साथ तकनीक, साइबर अपराध, आर्थिक अपराध, डिजिटल फ्रॉड, डेटा एनालिटिक्स और आधुनिक जांच पद्धतियों को भी शामिल किया गया।

--पुलिसकर्मियों के आश्रितों को मिली सहायता

उत्तर प्रदेश पुलिस के कल्याण तंत्र को कई स्तरों पर सुदृढ़ किया गया। पुलिस सैलरी पैकेज के नवीनीकरण के अंतर्गत 76 दिवंगत पुलिसकर्मियों के आश्रितों को कुल 137 करोड़ रुपये तथा 11 दिव्यांग पुलिस कर्मियों को 2.36 करोड़ रुपये की सहायता राशि के चेक प्रदान किए गए।

--सड़क सुरक्षा एवं जीरो फैटलिटी डिस्ट्रिक्ट योजना

सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम और सड़क सुरक्षा पर दिए गए विशेष बल के क्रम में एक जनवरी 2026 से प्रदेश के सभी 7 पुलिस कमिश्नरेट और 68 जनपदों में जीरो फैटलिटी डिस्ट्रिक्ट (जेएफड) योजना शुरू की गई। इसके अंतर्गत 487 अत्यधिक दुर्घटना-प्रवण थाना क्षेत्रों को चिन्हित किया गया और आधुनिक इनफोर्समेंट डिवाइस से युक्त 573 क्रैश कंट्रोल टीम तैनात की गईं।

इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से वर्ष 2026 की प्रथम तिमाही में वर्ष 2025 की तुलना में दुर्घटनाओं में 7.43 प्रतिशत, मृत्यु में 11.55 प्रतिशत और घायलों की संख्या में 8.05 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। 88 मैनोटोरिंग यूनिट्स में से 66 यूनिट्स अर्थात 75 प्रतिशत में सड़क दुर्घटना से होने वाली मौतों में गिरावट आई। प्रथम तिमाही में इस पहल से लगभग 450 सड़क दुर्घटना संबंधी मौतों को रोका गया, अर्थात प्रतिदिन लगभग पांच लोगों की जान बचाई जा सकी। इसी अवधि में 506 दुर्घटनाओं की कमी भी दर्ज की गई।

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