बसन्त पंचमी : पंचमी तिथि का सूर्योदय से संयोग, बौद्धिक साधना के लिए शुभ : प्रो.बिहारी लाल शर्मा

—पर्व पर पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र तथा शिव योग का विशेष प्रभाव

वाराणसी, 20 जनवरी (हि.स.)। बसन्त पंचमी पर्व के दिन मकर राशि में सूर्य एवं मीन राशि में चन्द्रमा का खास संयोग है। ज्योतिषीय दृष्टि से इस दिन का खास महत्व है। इसी दिन पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र तथा शिव योग का विशेष प्रभाव बन रहा है, जो ज्ञान, विद्या एवं बौद्धिक साधना के लिए अत्यन्त शुभ माना जाता है।

यह जानकारी मंगलवार को वाराणसी स्थित सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने दी। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभाग द्वारा उपलब्ध कराए गए प्रामाणिक पंचांगों, धर्मशास्त्रीय मान्यताओं एवं ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार बसन्त पंचमी (माघ शुक्ल पंचमी) तिथि का शुभारम्भ 22 जनवरी 2026 की मध्यरात्रि के पश्चात 23 जनवरी रात 02:29 बजे होगा, जो 23 जनवरी की मध्यरात्रि के उपरान्त 24 जनवरी 2026 को रात 01:46 बजे तक प्रभावी रहेगी।

इस प्रकार यह तिथि 23 जनवरी को सम्पूर्ण दिवस तथा 24 जनवरी को रात 01:46 बजे तक विद्यमान रहेगी। कुलपति प्रो. शर्मा ने स्पष्ट किया कि शास्त्रीय सिद्धान्त “तिथिं समनु प्राप्त उदयं याति भास्करः” के अनुसार, चूँकि 23 जनवरी 2026 को पंचमी तिथि का सूर्योदय से संयोग बन रहा है, अतः यही दिन बसन्त पंचमी पर्व एवं सरस्वती पूजन हेतु मुख्य रूप से मान्य रहेगा। साथ ही, मध्यरात्रि के उपरान्त भी पंचमी तिथि शेष रहने के कारण 24 जनवरी 2026 को सूर्योदय तक विद्यारम्भ, ज्ञान-दान, जप-तप एवं पूजनादि कर्म किए जा सकते हैं। उन्होंने बताया कि 23 जनवरी 2026 को प्रातः 07:56 बजे से अपराह्न 01:59 बजे तक श्री सरस्वती पूजन एवं विद्यारम्भ के लिए श्रेष्ठ मुहूर्त प्राप्त है।

कुलपति प्रो शर्मा ने कहा कि बसन्त पंचमी भारतीय संस्कृति में ऋतु परिवर्तन, नवचेतना, सृजनशीलता, कला एवं बौद्धिक जागरण का प्रतीक पर्व है। यह दिन विद्यार्थियों, शिक्षकों, साधकों एवं शोधार्थियों के लिए विशेष रूप से कल्याणकारी माना गया है।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

   

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