वाराणसी में पुलिस उपनिरीक्षकों की होगी मार्किंग प्रणाली से समीक्षा, उत्कृष्ट प्रदर्शन पर मिलेगा चौकी का चार्ज

वाराणसी, 28 मई (हि.स.)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में अब पुलिस उपनिरीक्षकों (एसआई) के कार्यों का मूल्यांकन मार्किंग प्रणाली के आधार पर किया जाएगा। पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने गुरुवार को यह निर्देश जारी करते हुए पुलिसिंग व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और प्रतिस्पर्धात्मक कार्यसंस्कृति को बढ़ावा देने पर जोर दिया।

पुलिस आयुक्त ने रोहनिया थाना, लोहता थाना तथा मंडुवाडीह के अर्दली रूम का निरीक्षण करने के बाद कानून-व्यवस्था, अभिलेखों और कार्यप्रणाली की समीक्षा की। समीक्षा बैठक में उन्होंने बताया कि जिले के सभी थानों में तैनात उपनिरीक्षकों के कार्यों का मूल्यांकन 100 अंकों की मार्किंग प्रणाली के तहत किया जाएगा।

निर्धारित व्यवस्था के अनुसार 60 दिनों के भीतर विवेचनाओं के निस्तारण पर 25 अंक, प्रार्थना पत्रों के समयबद्ध एवं संतोषजनक निस्तारण पर 25 अंक दिए जाएंगे। इसके अलावा एनबीडब्ल्यू के तहत गिरफ्तारी पर 10 अंक, बिना नम्बर प्लेट वाले वाहनों के विरुद्ध कार्रवाई पर 10 अंक तथा गलत दिशा में वाहन चलाने वालों पर कार्रवाई के लिए 10 अंक निर्धारित किए गए हैं।

वहीं जुआ, सट्टा, वेश्यावृत्ति, अवैध खनन, मादक पदार्थों के निर्माण एवं बिक्री जैसे अपराधों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई तथा अन्य सराहनीय कार्यों के लिए 20 अंक प्रदान किए जाएंगे। प्राप्त अंकों के आधार पर उपनिरीक्षकों की रैंकिंग तैयार होगी और उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वालों को चौकी प्रभारी बनाए जाने में प्राथमिकता दी जाएगी।

पुलिस आयुक्त ने निर्देश दिया कि सभी थानों में उपलब्ध पुलिस बल का 50 प्रतिशत हिस्सा दिन के समय प्रमुख चौराहों, मुख्य मार्गों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में तैनात रहेगा, ताकि पुलिस की दृश्य उपस्थिति बढ़े और जाम, अतिक्रमण व अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण रखा जा सके।

रात्रिकालीन सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में 25 प्रतिशत तथा शहरी क्षेत्रों में 20 प्रतिशत पुलिस बल को लगातार गश्त पर रखने के निर्देश दिए गए हैं। इस व्यवस्था की नियमित समीक्षा और आकस्मिक निरीक्षण स्वयं पुलिस आयुक्त करेंगे।

निरीक्षण के दौरान विवेचना रजिस्टर एवं एसआईडी क्रिएशन की प्रगति की समीक्षा करते हुए पुलिस आयुक्त ने निर्देशित किया कि प्रत्येक मुकदमे में शत-प्रतिशत यूनिक एसआईडी अनिवार्य रूप से बनाया जाए तथा कोई भी विवेचना 60 दिनों से अधिक लंबित न रखी जाए।

इसके साथ ही नव नियुक्त आरक्षियों को व्यवहारिक एवं तकनीकी प्रशिक्षण देने पर भी विशेष जोर दिया गया। उन्हें प्रतिदिन छह घंटे इनडोर और छह घंटे आउटडोर प्रशिक्षण देने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशिक्षण में जनसंपर्क, बीट ड्यूटी, गश्त, कानून-व्यवस्था, आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली और अभिलेखीय कार्यों की जानकारी शामिल होगी।

पुलिस आयुक्त ने नव आरक्षियों को सीसीटीएनएस प्रणाली, सीडीआर विश्लेषण, सीसीटीवी फुटेज परीक्षण, डीवीआर संचालन, ई-साक्ष्य और ई-समन प्रणाली का तकनीकी प्रशिक्षण देने के भी निर्देश दिए, ताकि उन्हें आधुनिक पुलिसिंग के अनुरूप दक्ष बनाया जा सके।

इस दौरान अपर पुलिस आयुक्त (अपराध) आलोक प्रियदर्शी, पुलिस उपायुक्त वरुणा जोन प्रमोद कुमार सहित संबंधित सहायक पुलिस आयुक्त, थाना प्रभारी और अन्य पुलिसकर्मी उपस्थित रहे।

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