हरी खाद ढैंचा की फसल लगाने से मृदा में बढ़ती है नाइट्रोजन की मात्रा : शैलेंद्र कुमार

—संयुक्त कृषि निदेशक ने ढैंचा की फसल से होने वाले लाभ की जानकारी किसानों को दी

वाराणसी, 27 जून (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के वाराणसह जनपद में शनिवार को विश्व बैंक के सहयोग से संचालित यूपी एग्रीज परियोजना अंतर्गत चयनित ग्राम हरसोस में किसानों को हरी खाद ढैंचा लगाने पर कृषि विशेषज्ञों ने जोर दिया। हरसोस गांव स्थित ढैंचा के प्रदर्शन प्रक्षेत्र का निरीक्षण कर वाराणसी मंडल के संयुक्त कृषि निदेशक शैलेन्द्र कुमार ने किसानों को हरी खाद ढैंचा की फसल से होने वाले लाभ की विस्तार से जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि ढैंचा की जड़ों में जो गांठे पाई जाती हैं उसमें लाभकारी सूक्ष्मजीव पाए जाते हैं जो वायुमंडल में पाए जाने वाली नाइट्रोजन का प्राकृतिक रूप से मिट्टी में संचय करते हैं। जिससे मृदा (खेत की मिट्टी) में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है। साथ ही साथ ढैंचा की फसल से मिट्टी की भौतिक दशा में सुधार होता है। जिसके कारण भूमि की जल धारण क्षमता भी बढ़ जाती है। मिट्टी में जितने भी सूक्ष्मजीवन होते हैं। इस प्रकार से ढैंचा हरी खाद लेने से किसान भाइयों को रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग कम करना पड़ता है।जिससे उनकी लागत में कमी आती है। तथा जो उत्पादन प्राप्त होता है वह भी बहुत उच्च गुणवत्ता का प्राप्त होता है। साथ ही साथ काम रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग से मिट्टी एवं पर्यावरण पर भी अच्छा प्रभाव पड़ता है। उन्होंने सभी किसानों से अपील किया कि जिन किसान भाइयों की ढैंचा की फसल 40 से 45 दिन की हो गई है वे लोग समय से खेत में इसकी पलटाई करते हुए धान की रोपाई करे। इसके पहले संयुक्त कृषि निदेशक ने जनपद के विकास खंड आराजी लाइन के राजकीय बीज गोदाम जंसा का निरीक्षण किया। उन्होंने कृषकों को निर्धारित दर पर समय से उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित किए जाने के लिए बहु उद्देश्यीय सहकारी समिति हाथी का भी निरीक्षण किया।

   

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