प्राकृतिक खेती पर्यावरण, जल संरक्षण और किसानों की समृद्धि की आधारशिला : एस. राजालिंगम

वाराणसी, 15 जून (हि.स.)। प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और किसानों को टिकाऊ कृषि पद्धतियों से जोड़ने के उद्देश्य से सोमवार को भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (आईआईवीआर) के सभागार में प्राकृतिक खेती एवं गौ-आधारित कृषि विषयक व्याख्यान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वाराणसी तथा आसपास के जिलों से आए लगभग 600 प्रगतिशील किसानों ने सहभागिता कर प्राकृतिक खेती की नवीन तकनीकों, वैज्ञानिक पहलुओं और व्यावहारिक अनुभवों की जानकारी प्राप्त की।

कार्यक्रम की अध्यक्षता मंडलायुक्त एस. राजालिंगम ने की। मुख्य वक्ता के रूप में देश के प्रख्यात प्राकृतिक कृषि विशेषज्ञ तथा बंसी गीर गोशाला एवं गोतीर्थ विद्यापीठ के संस्थापक गोपालभाई सतुरिया उपस्थित रहे। इस अवसर पर भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. राजेश कुमार, उप कृषि निदेशक अमित जायसवाल, जिला कृषि अधिकारी संगम सिंह सहित कृषि, उद्यान एवं अनुसंधान संस्थानों के वैज्ञानिक और अधिकारी मौजूद रहे। अहमदाबाद से आए कृषि वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने भी अपने विचार साझा किए।

मुख्य वक्ता गोपालभाई सतुरिया ने कहा कि प्राकृतिक खेती केवल खेती की एक तकनीक नहीं, बल्कि प्रकृति, पशुधन, मृदा और मानव स्वास्थ्य के बीच संतुलन स्थापित करने वाला एक समग्र जीवन-दर्शन है। उन्होंने गौ-आधारित कृषि, जीवामृत, घनजीवामृत तथा गो-कृपा अमृतम जैसे प्राकृतिक कृषि उपायों के माध्यम से खेती की लागत कम करने और भूमि की उर्वरता बढ़ाने के सफल अनुभव किसानों के साथ साझा किए। उन्होंने कहा कि रासायनिक खेती के दुष्प्रभावों से मुक्ति दिलाने और कृषि को टिकाऊ बनाने में प्राकृतिक खेती एक प्रभावी विकल्प बनकर उभर रही है। साथ ही उन्होंने देशी गोवंश संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन और स्थानीय संसाधनों के अधिकतम उपयोग पर विशेष बल दिया। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने किसानों को गो-कृपा अमृतम की निःशुल्क बोतलें भी वितरित कीं।

मंडलायुक्त एस. राजालिंगम ने अपने संबोधन में कहा कि प्राकृतिक खेती पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण तथा किसानों की आर्थिक समृद्धि के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने किसानों से वैज्ञानिकों एवं कृषि विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में प्राकृतिक खेती अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि सरकार भी इस दिशा में विभिन्न योजनाओं के माध्यम से किसानों को प्रोत्साहित कर रही है।

आईआईवीआर के निदेशक डॉ. राजेश कुमार ने कहा कि प्राकृतिक खेती और वैज्ञानिक अनुसंधान का समन्वय भविष्य की कृषि को अधिक टिकाऊ, लाभकारी और पर्यावरण-अनुकूल बनाएगा। उन्होंने किसानों को संस्थान द्वारा विकसित उन्नत कृषि तकनीकों तथा प्राकृतिक खेती के वैज्ञानिक आधारों की जानकारी दी।

उप कृषि निदेशक अमित जायसवाल ने किसानों का स्वागत करते हुए कहा कि जनपद में प्राकृतिक खेती को जनआंदोलन का स्वरूप देने के लिए विभाग लगातार प्रयास कर रहा है। किसानों को प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है ताकि अधिक से अधिक कृषक प्राकृतिक खेती से जुड़ सकें।

कार्यक्रम के दौरान किसानों ने प्राकृतिक खेती से संबंधित विभिन्न प्रश्नों और जिज्ञासाओं का समाधान विशेषज्ञों से प्राप्त किया। सफल कृषकों और कृषि वैज्ञानिकों के अनुभवों ने प्रतिभागियों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम ने किसानों को टिकाऊ कृषि की दिशा में नए अवसरों और संभावनाओं से अवगत कराया।

   

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