उत्तराखंड में ‘सर्व सेफ फूड’ परियोजना का विस्तार, 1500 स्ट्रीट फूड विक्रेताओं को मिलेगा प्रशिक्षण

हरिद्वार, 07 जून (हि.स.)। उत्तराखंड में खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से फ़ूड एण्ड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए), नेशनल एसोसिएशन ऑफ स्ट्रीट वेंडर्स ऑफ इंडिया (एनएसवीआई) तथा नेस्ले इंडिया ने संयुक्त रूप से ‘सर्व सेफ फूड’ परियोजना का विस्तार किया है।

इस पहल के तहत राज्य के आठ जिलों में 1500 स्ट्रीट फूड विक्रेताओं को खाद्य सुरक्षा, स्वच्छता और व्यवसायिक कौशल का प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। प्रशिक्षण कार्यक्रम का संचालन एनएसवीआई द्वारा किया जाएगा, जिसमें देहरादून, हरिद्वार, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, पौड़ी गढ़वाल और टिहरी गढ़वाल सहित विभिन्न जिलों के विक्रेताओं को शामिल किया जाएगा।

परियोजना के उद्घाटन समारोह में एफडीए के उपायुक्त गणेश कंडवाल, अपर आयुक्त ताज बार सिंह, हरिद्वार के सहायक नगर आयुक्त एम.एन. जोशी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी आर.के. सिंह तथा नेस्ले इंडिया के पंतनगर फैक्ट्री मैनेजर अमित दुग्गल व स्ट्रीट वेंडर्स संगठन के प्रदेश अध्यक्ष संजय चोपड़ा सहित कई लोग उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के तहत स्ट्रीट फूड विक्रेताओं को स्वास्थ्य एवं स्वच्छता मानकों, सुरक्षित खाद्य प्रबंधन, अपशिष्ट निपटान तथा उद्यमिता से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी और प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसका उद्देश्य न केवल खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करना है, बल्कि विक्रेताओं के व्यवसायिक विकास को भी प्रोत्साहित करना है।

नेस्ले इंडिया के प्रतिनिधि कुंवर हिम्मत सिंह ने कहा कि ‘सर्व सेफ फूड’ परियोजना के माध्यम से स्ट्रीट फूड विक्रेताओं को स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे उनकी जागरूकता और कौशल दोनों में वृद्धि हो रही है।

गौरतलब है कि नेस्ले इंडिया ने वर्ष 2016 में ‘सर्व सेफ फूड’ परियोजना की शुरुआत की थी। तब से यह कार्यक्रम देश के 27 राज्यों और 4 केंद्र शासित प्रदेशों में संचालित किया जा चुका है, जिसके माध्यम से 1.20 लाख से अधिक स्ट्रीट फूड विक्रेताओं को प्रशिक्षित किया गया है। इस पहल ने खाद्य सुरक्षा मानकों को मजबूत करने और उपभोक्ताओं को सुरक्षित भोजन उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

उत्तराखंड में परियोजना के विस्तार से राज्य के हजारों स्ट्रीट फूड विक्रेताओं को लाभ मिलेगा तथा सुरक्षित और स्वच्छ खाद्य संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा।

   

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