विमल नेगी मामले में पत्नी ने राज्यपाल से लगाई न्याय की गुहार, दो पूर्व अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग
- DSS Admin
- Jun 29, 2026
शिमला, 29 जून (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीपीसीएल) के दिवंगत चीफ इंजीनियर विमल नेगी की पत्नी किरण नेगी ने मामले में पावर कॉरपोरेशन के दो पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई है। सोमवार को उन्होंने हिमाचल जनजातीय लोक अधिकार महासंघ के प्रतिनिधियों के साथ राज्यपाल से मुलाकात कर अपनी मांगों से अवगत कराया।
किरण नेगी ने राज्यपाल को सौंपे गए ज्ञापन में कहा कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की जांच में दो पूर्व अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार से जुड़े तथ्य सामने आए हैं।
उनका आरोप है कि इसके बावजूद अब तक उनके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि मामले में कुछ लोगों को बचाने की कोशिश की जा रही है, जिससे परिवार को न्याय मिलने में बाधा आ रही है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मामले की जांच के दौरान शिमला पुलिस की ओर से सबूत मिटाने का प्रयास किया गया। किरण नेगी का कहना है कि इस पहलू की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यदि किसी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता हुई है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि परिवार जल्द ही भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सीबीआई को अलग से शिकायत भी सौंपेगा। उनका कहना है कि उपलब्ध तथ्यों के आधार पर केंद्रीय एजेंसी उचित कार्रवाई करेगी।
किरण नेगी ने राज्यपाल से पूरे मामले में निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने, दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने और परिवार को न्याय दिलाने के लिए आवश्यक हस्तक्षेप करने की मांग की। उन्होंने कहा कि परिवार शुरू से ही मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करता रहा है।
गौरतलब है कि विमल नेगी 10 मार्च 2025 को लापता हो गए थे। उनका शव 18 मार्च 2025 को बिलासपुर जिले में गोबिंदसागर झील से बरामद किया गया था। उनके लापता होने के बाद किरण नेगी ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर पावर कॉरपोरेशन के तत्कालीन प्रबंध निदेशक, एक निदेशक और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों पर उनके पति को प्रताड़ित करने के आरोप लगाए थे।
इसके बाद 19 मार्च 2025 को सरकार की ओर से मामले में एफआईआर दर्ज करवाई गई। किरण नेगी की शिकायत पर न्यू शिमला पुलिस थाना में मामला दर्ज हुआ। इसमें तत्कालीन प्रबंध निदेशक और निदेशक को कथित तौर पर आरोपी बनाया गया। इसके बाद सरकार ने दोनों अधिकारियों को उनके पदों से हटा दिया था।
हालांकि, पुलिस जांच से असंतुष्ट परिजनों ने मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो को सौंपने की मांग करते हुए हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट का रुख किया। मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने 23 मई 2025 को जांच सीबीआई को सौंपने के आदेश दिए थे। इसके बाद से केंद्रीय एजेंसी इस मामले की जांच कर रही है।
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