तृणमूल संसदीय दल में फेरबदल के बाद सामने आई काकाेली घोष की नाराजगी

कोलकाता, 15 मई (हि.स.)। लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस संसदीय दल के मुख्य सचेतक पद से हटाए जाने के बाद बारासात से सांसद काकाेली घोष दस्तिदार ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उनकी टिप्पणी को पार्टी नेतृत्व के फैसले पर नाराजगी और निराशा के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी ने गुरुवार को कालीघाट में पार्टी सांसदों की बैठक के दौरान काकाेली घोष दस्तिदार को मुख्य सचेतक पद से हटाकर श्रीरामपुर के सांसद कल्याण बनर्जी को फिर से इस पद की जिम्मेदारी सौंपने की घोषणा की थी।

इसके बाद काकाेली ने सोशल मीडिया पर लिखा, “1976 में परिचय हुआ, 1984 में राजनीतिक सफर शुरू हुआ। चार दशक की निष्ठा का आज पुरस्कार मिला।” राजनीतिक हलकों में उनकी इस टिप्पणी को पार्टी नेतृत्व के फैसले पर अप्रत्यक्ष असंतोष के रूप में देखा जा रहा है।

उल्लेखनीय है कि, 1976 में जब ममता बनर्जी छात्र राजनीति में सक्रिय थीं, उसी समय काकाेली घोष दस्तिदार भी कांग्रेस के छात्र संगठन से जुड़ी थीं। बाद में 1984 में ममता बनर्जी ने जादवपुर लोकसभा सीट से पहली बार चुनाव लड़कर वाममोर्चा नेता सोमनाथ चटर्जी को पराजित किया था। तब से काकाेली लंबे समय तक ममता की करीबी सहयोगियों में मानी जाती रही हैं।

पिछले वर्ष अगस्त में कल्याण बनर्जी ने अचानक संसदीय दल के मुख्य सचेतक पद से इस्तीफा दे दिया था। उस समय कृष्णानगर की सांसद महुआ मोइत्रा के साथ उनका सार्वजनिक विवाद चर्चा में था। इसके बाद ममता बनर्जी ने उनका इस्तीफा स्वीकार करते हुए काकाेली घोष दस्तिदार को मुख्य सचेतक बनाया था।

इससे पहले काकाेली लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस की उपनेता थीं। कल्याण बनर्जी के इस्तीफे के बाद उन्हें मुख्य सचेतक बनाए जाने पर अभिनेत्री और सांसद शताब्दी राय को उपनेता बनाया गया था। अब कल्याण बनर्जी की वापसी के बाद शताब्दी राय उपनेता बनी हुई हैं, जबकि काकाेली के पास संसदीय दल में कोई पद नहीं बचा है। पार्टी के कई नेताओं का मानना है कि इसी कारण उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी जाहिर की है।

विधानसभा चुनाव में राज्य में तृणमूल कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा है और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) स्पष्ट बहुमत के साथ सत्ता में आई है। इसके बाद से पार्टी के अंदरूनी मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं।

तृणमूल नेता कुणाल घोष ने भी हाल में सोशल मीडिया पर पार्टी के आत्मविश्लेषण की जरूरत बताई थी। उन्होंने कहा था कि तापस राय और सजल घोष जैसे नेताओं को पार्टी छोड़ने के लिए मजबूर किया गया। पार्टी विरोधी टिप्पणियों को लेकर तृणमूल कांग्रेस को अपने कई प्रवक्ताओं को निलंबित भी करना पड़ा है।

ऐसे माहौल में कालीघाट की बैठक में ममता बनर्जी ने सांसदों को पार्टी के कठिन समय में एकजुट रहने का संदेश दिया था। हालांकि, अगले ही दिन काकाेली घोष दस्तिदार की पोस्ट ने पार्टी के भीतर असंतोष की चर्चाओं को और तेज कर दिया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधानसभा चुनाव परिणामों को देखते हुए मुख्य सचेतक पद में बदलाव को सीधे तौर पर चुनावी प्रदर्शन से जोड़कर नहीं देखा जा सकता। बारासात लोकसभा क्षेत्र की सात विधानसभा सीटों में से पांच पर भाजपा को जीत मिली, जबकि कल्याण बनर्जी के श्रीरामपुर क्षेत्र में भी तृणमूल कांग्रेस को 5-2 के अंतर से हार का सामना करना पड़ा। ऐसे में कल्याण बनर्जी की वापसी और काकाेली को हटाने के पीछे की वास्तविक वजह अब भी स्पष्ट नहीं हो पाई है।---------------

   

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