साइबर अपराधों से निपटने के लिए पुलिस, अभियोजन और न्याय व्यवस्था को और मजबूत बनाने पर जोर
- DSS Admin
- May 09, 2026
जयपुर, 09 मई (हि.स.)। केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने कहा है कि तकनीक के बढ़ते उपयोग के साथ अपराधों का स्वरूप तेजी से बदल रहा है और साइबर अपराध आज सबसे बड़ी चुनौतियों में शामिल हैं। ऐसे अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए पुलिस, अभियोजन और न्यायिक व्यवस्था को अधिक सक्षम, तकनीकी रूप से सशक्त और संवेदनशील बनाना आवश्यक है।
शनिवार को जयपुर के बिरला ऑडिटोरियम में आयोजित लोक अभियोजकों की एक दिवसीय कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में मेघवाल ने कहा कि साइबर अपराध पारंपरिक अपराधों से अलग हैं, जिनके अनुसंधान और अभियोजन में डिजिटल एवं तकनीकी साक्ष्यों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने नए भारतीय न्याय कानूनों को औपनिवेशिक दंड व्यवस्था से आगे बढ़ते हुए अधिक न्यायोन्मुख बताया।
राजस्थान उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा ने कहा कि पीड़ितों को त्वरित न्याय दिलाने में लोक अभियोजकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है और उन्हें कानून के साथ तकनीकी ज्ञान में भी दक्ष होना होगा।
राजस्थान के विधि एवं विधिक कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने कहा कि भारत न्याय व्यवस्था के नए युग में प्रवेश कर चुका है, जहां दंड के बजाय न्याय को प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए जनजागरूकता को भी अत्यंत आवश्यक बताया।
महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद ने लोक अभियोजकों को “मिनिस्टर ऑफ जस्टिस” बताते हुए कहा कि उनका दायित्व सत्य की खोज और पीड़ित को न्याय दिलाना है। वहीं पुलिस महानिदेशक राजीव शर्मा ने डिजिटल एविडेंस, अभियोजन समन्वय और जवाबदेही बढ़ाने पर विशेष जोर दिया।
कार्यशाला के दौरान विधि एवं विधिक कार्य विभाग के नए लोगो का विमोचन किया गया तथा विभागीय कार्यप्रणाली पर आधारित लघु फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया। इस कार्यक्रम में वरिष्ठ न्यायाधीश, लोक अभियोजक, अधिवक्ता और प्रशासनिक अधिकारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यशाला का उद्देश्य साइबर अपराध, दिव्यांगजन मामलों और नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए अभियोजन तंत्र को अधिक दक्ष और संवेदनशील बनाना रहा।
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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित

