यज्ञ से शुद्ध वातावरण, सुदृढ़ राष्ट्र-वेद मन्दिर योल में गूंजा वैदिक संदेश
- DSS Admin
- May 23, 2026

कठुआ, 23 मई । वेद मन्दिर योल में चल रहे 78 दिवसीय चारों वेदों के यज्ञानुष्ठान के 42वें दिन स्वामी राम स्वरूप जी योगाचार्य ने श्रद्धालुओं को यजुर्वेद मन्त्र 1/2 का गूढ़ अर्थ समझाते हुए यज्ञ के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि यज्ञ कर्म विश्व का सर्वोत्तम एवं कल्याणकारी कर्म है, जो न केवल समस्त जगत का उपकार करता है बल्कि परमेश्वर की प्राप्ति का मार्ग भी प्रशस्त करता है। यज्ञ को सभी सुखों की वर्षा करने वाला बताते हुए उन्होंने कहा कि परमेश्वर ने इस मन्त्र में स्पष्ट आदेश दिया है कि विद्वान और यजमान को ऐसे कल्याणकारी यज्ञ का कभी भी त्याग नहीं करना चाहिए। स्वामी जी ने बताया कि हवन कुण्ड में अग्नि में डाले जाने वाले सुगन्धित, पौष्टिक एवं कीटाणुनाशक पदार्थ वेद मन्त्रों के साथ सूक्ष्म रूप में परिवर्तित होकर वायु और सूर्य की किरणों के माध्यम से पूरे वातावरण में फैलते हैं। इससे वायु शुद्ध होती है और शुद्ध वर्षा होती है जिससे शुद्ध जल एवं उत्तम अन्न-फल की प्राप्ति होती है। उन्होंने कहा कि इसका सीधा प्रभाव मनुष्य के स्वास्थ्य और बुद्धि पर पड़ता है जिससे समाज और राष्ट्र सुदृढ़ बनता है।
उन्होंने भगवद्गीता के श्लोक 3/14 का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने भी यज्ञ को सृष्टि के संतुलन और समृद्धि का आधार बताया है। साथ ही उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण ने अपने जीवन में यज्ञ एवं वेद मार्ग का पालन कर सम्पूर्ण पृथ्वी के कल्याण का मार्ग प्रशस्त किया। स्वामी राम स्वरूप जी ने खेद व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान समय में लोग वेदों के उपदेशों से दूर होते जा रहे हैं जिसके कारण समाज में दुःख और अशांति बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि यज्ञ जैसे महान और रोगनाशक कर्म का त्याग ही आज की समस्याओं का एक बड़ा कारण है जबकि लोगों को इसका सही ज्ञान नहीं है। अंत में उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे वेदों के आदेशों का पालन करते हुए यज्ञ कर्म को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं जिससे व्यक्तिगत, सामाजिक और राष्ट्रीय स्तर पर सुख-समृद्धि प्राप्त की जा सके।
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