वेद मंत्रों से यज्ञ अग्निहोत्र दिलाते हैं आरोग्य और दीर्घायु-स्वामी राम स्वरूप जी

Yajna and Agnihotra performed with Vedic mantras bestow good health and longevity – Swami Ram Swarup Ji.


कठुआ, 23 जून । वेद मन्दिर योल में चल रहे 78 दिवसीय चारों वेदों के यज्ञानुष्ठान के 73वें दिन स्वामी राम स्वरूप जी योगाचार्य ने श्रद्धालुओं को अथर्ववेद काण्ड 20 सूक्त 96 के आधार पर गहन आध्यात्मिक उपदेश दिया।

स्वामी जी ने कहा कि परमेश्वर विलासी और भोग-विलास में लिप्त मनुष्य को कठोर दण्ड देता है। इसलिए मनुष्य को धनवान होने पर भी श्रीराम और श्रीकृष्ण की तरह वेद विद्या को अपनाकर धर्ममय जीवन जीना चाहिए।

उन्होंने बताया कि वेद मंत्रों से अग्निकुण्ड में दी गई आहुतियाँ अज्ञात रोगों, क्षयरोग तथा अन्य अनेक बीमारियों से मुक्ति दिलाने में सहायक होती हैं। अग्निहोत्र करने से शरीर के अंग-अंग के दर्द, जकड़न और पीड़ा भी दूर होती है। अथर्ववेद मंत्र 20/96/7 का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि परमेश्वर स्वयं कहते हैं कि यदि मनुष्य अत्यंत रोगग्रस्त होकर मृत्यु के निकट भी पहुँच जाए तो ईश्वर उसे मृत्यु से बचाकर 100 वर्ष की आयु और बल प्रदान कर सकता है। इसी प्रकार मंत्र 20/96/8 में भी ईश्वर बताते हैं कि वेदमंत्रों द्वारा किए गए यज्ञ-अग्निहोत्र से रोगी को रोगमुक्त कर दीर्घ और निरोग जीवन प्रदान किया जाता है।

स्वामी जी ने यह भी कहा कि यज्ञ में दी गई आहुतियाँ केवल व्यक्ति ही नहीं बल्कि हजारों जीवों के कल्याण का माध्यम बनती हैं। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जब से मानव ने वेद विद्या का त्याग किया है तब से जीवन में दुःख, चिंता, रोग और विकारों का प्रभाव बढ़ता गया है जिससे समाज दीन अवस्था की ओर अग्रसर हो रहा है।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया और वेद ज्ञान को अपनाने का संकल्प लिया।

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