जालंधर पुलिस की बड़ी कार्रवाई:विदेशी हैंडलर्स से जुड़े जबरन वसूली और फायरिंग गैंग के 4 गुर्गे दबोचे, 3 आधुनिक पिस्तौल और जिंदा कारतूस बरामद

जालंधर कमिश्नरेट पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस ने जबरन वसूली और फायरिंग की वारदातों में शामिल एक बड़े गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए इसके 4 सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपी विदेश में बैठे आपराधिक हैंडलर्स के सीधे संपर्क में थे और उन्हीं के इशारे पर वारदातों को अंजाम देते थे। पुलिस ने इनके कब्जे से 3 आधुनिक पिस्तौल और भारी मात्रा में जिंदा कारतूस बरामद किए हैं। इस गिरफ्तारी से पंजाब के दो बड़े जिलों में टारगेट किलिंग और दहशत फैलाने की एक बड़ी साजिश नाकाम हो गई है। विदेशी हैंडलर्स के इशारे पर रची जा रही थी साजिश जालंधर कमिश्नरेट पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि कुछ अपराधी शहर में किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की फिराक में घूम रहे हैं। इस पर त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस टीम ने जाल बिछाया और गैंग के चार गुर्गों को हथियारों समेत दबोच लिया। शुरुआती जांच और पूछताछ में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि ये सभी आरोपी सीमा पार यानी विदेशों में बैठे अपने आकाओं के इशारे पर काम कर रहे थे। ये हैंडलर्स इंटरनेट कॉलिंग और सोशल मीडिया ऐप्स के जरिए इन्हें टारगेट और फंडिंग मुहैया करा रहे थे। जालंधर और SBS नगर में फायरिंग की योजना पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, पकड़े गए आरोपी जालंधर और शहीद भगत सिंह नगर में फायरिंग की कई बड़ी घटनाओं की योजना बनाने और उन्हें अंजाम देने में शामिल थे। इनका मुख्य मकसद व्यापारियों और रसूखदार लोगों को डरा-धमकाकर उनसे मोटी रकम वसूलना था। इस गैंग ने हाल के दिनों में दहशत का माहौल पैदा करने के लिए कई जगहों पर रेकी भी की थी। पुलिस समय रहते इन्हें दबोचकर बड़ी वारदातों को टालने में कामयाब रही है। आरोपियों के पास से बरामद 3 आधुनिक पिस्तौल बेहद घातक हैं, जिन्हें विशेष रूप से वारदातों के लिए सप्लाई किया गया था। भार्गो कैंप थाने में FIR दर्ज, इस मामले को लेकर जालंधर कमिश्नरेट के थाना भार्गो कैंप में संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर ली गई है। पुलिस अब आरोपियों को रिमांड पर लेकर कड़ाई से पूछताछ कर रही है ताकि इनके पूरे नेटवर्क को ध्वस्त किया जा सके। पुलिस इस जांच में जुटी है कि इन अपराधियों को हथियार कहां से सप्लाई किए गए थे और इन्हें स्थानीय स्तर पर कौन-कौन मदद पहुंचा रहा था। इस नेटवर्क के पिछले और आगे के कनेक्शन का पता लगाने के लिए तकनीकी टीमों की भी मदद ली जा रही है।

   

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