प्राकृतिक खेती काे प्रोत्साहन देने के लिए सरकार ने शुरू की योजना
- DSS Admin
- May 13, 2026
किसानों को 5 साल मिलेगा 10 हजार प्रति एकड़ अनुदान
10 जिलों में बनेगी जैविक खेती की विशेष मंडियां
चंडीगढ़, 13 मई (हि.स.)। नायब सरकार ने प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा देने की ओर बड़ा कदम उठाते हुए किसानों को अगले पांच वर्षों तक प्रति एकड़ प्रति वर्ष 10 हजार रुपये का अनुदान देने का फैसला लिया है। इसके तहत, 800 एकड़ सरकारी भूमि पर भी 10 वर्षों तक प्राकृतिक और जैविक खेती कराई जाएगी। किसानों को प्रमाणन, विशेष मंडी स्थान और आधुनिक लैब जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी।
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा ने बताया कि राज्य सरकार प्रदेश में प्राकृतिक और जैविक खेती को व्यापक स्तर पर बढ़ावा देने के लिए ठोस और दूरगामी कदम उठा रही है।
उन्होंने बताया कि बदलते समय में उपभोक्ता भी स्वास्थ्य के प्रति अधिक जागरूक हो रहे हैं और जैविक उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में हरियाणा सरकार किसानों को इस दिशा में प्रोत्साहित कर रही है ताकि उन्हें अपनी उपज का बेहतर बाजार मूल्य मिल सके।
जो किसान प्राकृतिक या जैविक खेती अपनाएंगे, उन्हें अगले पांच वर्षों तक प्रति एकड़ प्रति वर्ष 10,000 रुपये का अनुदान दिया जाएगा। हालांकि, इस योजना का लाभ उठाने के लिए किसानों को अपनी उपज का प्रमाणन पहले से ही कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) से करवाना अनिवार्य होगा, जिससे उनके उत्पादों की गुणवत्ता और विश्वसनीयता सुनिश्चित हो सके।
कृषि मंत्री ने यह भी बताया कि किसानों को प्रमाणन प्रक्रिया में किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए राज्य स्तर पर ही एक अधिकृत संस्था विकसित की जा रही है। इसके तहत हरियाणा राज्य बीज प्रमाणीकरण एजेंसी को जैविक खेती के प्रमाणीकरण के लिए अधिकृत संस्था के रूप में नामित किया जाएगा।
कृषि मंत्री ने बताया कि राज्य के विभिन्न जिलों पंचकूला, यमुनानगर, करनाल, सोनीपत, रोहतक, गुरुग्राम, फरीदाबाद, हिसार, चरखी दादरी और नारनौल में प्राकृतिक और जैविक खेती करने वाले किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए मंडियों में विशेष स्थान उपलब्ध करवाया जाएगा। राज्य में कृषि विभाग के स्वामित्व वाली लगभग 800 एकड़ भूमि को भी इस योजना के तहत उपयोग में लाया जाएगा। यह भूमि केवल उन्हीं किसानों को पट्टे पर दी जाएगी, जो कम से कम 10 वर्षों तक उस पर प्राकृतिक या जैविक खेती करने के लिए प्रतिबद्ध होंगे। इस कदम से दीर्घकालिक रूप से जैविक खेती का एक मजबूत आधार तैयार होगा और किसानों को स्थायी लाभ मिलेगा।
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