हरियाणा में प्राइवेट अस्पतालों के हेल्थ पैकेज का वेरिफिकेशन होगा:हाईकोर्ट ने दिए निर्देश; कहा-भ्रामक पैकेजिंग बर्दाश्त नहीं, 3 महीने में मांगी रिपोर्ट
- DSS Admin
- May 12, 2026
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने प्राइवेट अस्पतालों द्वारा मरीजों को कम दर वाले आकर्षक उपचार पैकेज दिखाकर बाद में अलग-अलग प्रक्रियाओं के नाम पर अतिरिक्त शुल्क वसूलने की प्रथा पर कड़ा रुख अपनाया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि इस तरह की “भ्रामक पैकेजिंग” अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने हरियाणा के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक को निर्देश दिए हैं कि राज्य के सभी सूचीबद्ध अस्पतालों की पैकेज दरों का स्वयं या संबंधित सिविल सर्जनों के माध्यम से सत्यापन कराया जाए। यदि कोई अस्पताल नीति का उल्लंघन करता पाया गया तो उसका लाइसेंस रद्द करने तक की कार्रवाई की जाएगी। मरीज को उसकी भाषा में समझानी होगी पूरी लागत हाईकोर्ट ने कहा कि इलाज की अनुमानित लागत मरीज या उसके परिजनों को उनकी समझ की सरल भाषा में स्पष्ट रूप से बताई जाए। केवल मुद्रित फार्म पर हस्ताक्षर करवाना पर्याप्त नहीं माना जाएगा। सस्ता पैकेज दिखाकर बाद में वसूली पर रोक हाईकोर्ट ने कहा कि मरीजों को आकर्षित करने के लिए पैकेज दरों को कृत्रिम रूप से कम दिखाना और बाद में आवश्यक प्रक्रियाओं के लिए अलग से शुल्क जोड़कर अंतिम बिल बढ़ाना पूरी तरह अनुचित है और इसे तत्काल रोका जाए। तीन महीने में अनुपालन रिपोर्ट न्यायालय ने पूरी प्रक्रिया को लागू करने और अनुपालन रिपोर्ट अदालत में दाखिल करने के लिए तीन महीने की समयसीमा तय की है। न्यायमूर्ति बरार ने कहा कि चिकित्सा सेवा एक गरिमामय क्षेत्र है और राज्य की नीतियों में यह गरिमा झलकनी चाहिए। यदि करुणा पर वाणिज्य हावी हो जाए तो ऐसी नीति कल्याणकारी नहीं रह जाती। जान बचाने वाली प्रक्रियाओं का खर्च भी प्रतिपूर्ति योग्य अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी मरीज की जान बचाने के लिए “आवश्यकता और आपातकाल” के तहत कोई प्रक्रिया की गई है, तो उसका खर्च सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के अनुरूप प्रतिपूर्ति के योग्य होगा। राज्य केवल इस आधार पर भुगतान से इनकार नहीं कर सकता कि वह प्रक्रिया मूल पैकेज में शामिल नहीं थी।

