13 लाख रिश्वत केस, इंस्पेक्टर व दो बिचौलिए जेल भेजे:चंडीगढ़ CBI ने आमने-सामने बैठाकर की पूछताछ, कई अहम नाम आने की चर्चा

पंजाब विजिलेंस मुख्यालय से जुड़े 13 लाख रुपये की कथित रिश्वतखोरी मामले में गिरफ्तार विजिलेंस इंस्पेक्टर आप राणा, बिचौलिए राघव गोयल और उसके पिता विकास गोयल उर्फ विक्की गोयल को शुक्रवार को सीबीआई की विशेष अदालत में पेश किया गया। पांच दिन का रिमांड पूरा होने के बाद अदालत ने तीनों आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। सूत्रों के अनुसार सीबीआई ने रिमांड के दौरान इंस्पेक्टर राणा और दोनों बिचौलियों से अलग-अलग तथा आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की। जांच एजेंसी ने मामले से जुड़े कई पहलुओं पर गहन पूछताछ की और रिश्वत लेन-देन के कथित नेटवर्क को समझने का प्रयास किया। आमने-सामने पूछताछ में अहम जानकारियां मिलीं सूत्रों का कहना है कि रिमांड अवधि के दौरान सीबीआई ने आरोपियों के बयानों का मिलान किया। इस दौरान मामले से जुड़े पंजाब विजिलेंस के कुछ अन्य अधिकारियों के नाम भी सामने आने की चर्चा है। हालांकि सीबीआई ने अभी तक किसी अधिकारी का नाम सार्वजनिक नहीं किया है और न ही इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी किया गया है। सीबीआई फिलहाल सामने आई जानकारियों की जांच कर रही है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और लोगों के नाम सामने आ सकते हैं तथा जांच आगे बढ़ सकती है। मोबाइल फोन और कॉल रिकॉर्ड की जांच सूत्रों के मुताबिक सीबीआई ने इंस्पेक्टर राणा के मोबाइल फोन की चैट, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की भी जांच की है। जांच के दौरान एजेंसी को कुछ महत्वपूर्ण सुराग और तकनीकी साक्ष्य मिले हैं, जिनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है। आरोपी ओपी राणा पंजाब विजिलेंस में काफी लंबे समय से तैनात था। इसे लेकर CBI उन सभी अफसरों की सूची तैयार कर रही है, जिनके साथ ओपी राणा ने बतौर रीडर काम किया है। उस दौरान अफसरों के साथ आरोपी का तालमेल किस तरह का था, इसका भी पता लगाया जा रहा है। इसके अलावा तीन साल बाद तबादले की प्रक्रिया होने के बावजूद ओपी राणा रीडर के पद पर तैनात रहा। यह किस अफसर की मेहरबानी से संभव हुआ, इसका भी पता CBI लगा रही है। आरोपी बोला चंडीगढ़ बर्थडे पार्टी में गया था वकील ने चंडीगढ़ अदालत को यह भी बताया था कि आरोपी बाद में सेक्टर-7 में एक बर्थडे पार्टी में गया था। बचाव पक्ष ने खरीदारी के बिल भी कोर्ट में पेश किए। इसी आधार पर आरोपी की ओर से शाम फैशन मॉल और सेक्टर-35 फूल मार्केट के सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने की मांग की गई, जिसे अदालत ने मंजूर कर लिया। हालांकि, इन दलीलों के बावजूद आरोपी को राहत नहीं मिल सकी। अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान सीबीआई ने आरोपी के दावों का कड़ा विरोध किया। FIR में क्या, 3 पॉइंट में पढ़िए… स्टेट टैक्स ऑफिसर की शिकायत: विजिलेंस के खिलाफ शिकायत 8 मई को अमित कुमार निवासी अबोहर, फाजिल्का ने दी थी, जो स्टेट टैक्स ऑफिसर के पद पर तैनात हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राघव गोयल और उसके पिता विकास गोयल उर्फ विक्की गोयल ठेकेदार हैं। दोनों डीजी विजिलेंस शरद सत्य चौहान और उनके रीडर ओपी राणा की ओर से बिचौलियों के रूप में काम कर रहे थे। आरोपियों ने विजिलेंस मुख्यालय में उसके खिलाफ लंबित शिकायत बताकर उसके निपटारे के लिए रिश्वत मांगी। जैसे ही यह शिकायत मिली, उसके बाद सीबीआई ने एक्शन शुरू किया। 13 लाख रुपए की रिश्वत मांगी: जैसे ही सीबीआई को अमित कुमार की शिकायत मिली, इसकी जांच और वेरिफिकेशन की जिम्मेदारी सीबीआई एसीबी चंडीगढ़ के इंस्पेक्टर अरुण अहलावत को सौंपी गई। वेरिफिकेशन के दौरान यह बात सामने आई कि आरोपी राघव गोयल और विकास गोयल ने शिकायतकर्ता से 13 लाख रुपए की रिश्वत मांगी थी। कैश के साथ मोबाइल भी मांगा: जांच में यह भी पता चला कि नकद रकम के अलावा आरोपी ओपी राणा के लिए एक मोबाइल फोन की मांग भी की थी। रकम ओपी राणा और डीजी (विजिलेंस) के नाम पर मांगी जा रही थी। 11 मई 2026 की वेरिफिकेशन रिपोर्ट के आधार पर सीबीआई ने माना कि मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 61(2) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 व 7A के तहत अपराध बनता है। इसके बाद औपचारिक एफआईआर दर्ज की गई। इस केस में अब तक क्या-क्या हुआ 11 मई: CBI ने रिश्वत लेते पकड़ा स्टेट टैक्स ऑफिसर अमित कुमार की शिकायत पर CBI ने चंडीगढ़ के होटल में ट्रैप लगाया। होटल में कमरा बुक करवाया गया, जहां बिचौलिए और अन्य लोग मिले। इसी दौरान सीबीआई टीम ने दबिश दी और आरोपी अंकित वाधवा को शिकायतकर्ता से 13 लाख रुपए कैश और मोबाइल फोन लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया। राघव और विकास गोयल भागने लगे, लेकिन अंबाला के पास पकड़ लिए गए। ओपी राणा फरार हो गया। इसके बाद CBI ने मोहाली स्थित विजिलेंस हेडक्वार्टर में देर रात रेड की। रिकॉर्ड खंगाले गए और कई दस्तावेज कब्जे में लिए गए। 12 मई: 9 लाख कैश और दस्तावेज बरामद मंगलवार सुबह करीब 7 बजे सीबीआई की टीमें दोबारा विजिलेंस कार्यालय पहुंचीं और पहली मंजिल पर स्थित दफ्तर में छानबीन शुरू की। शुरुआत में कर्मचारियों को बाहर रोका गया, लेकिन बाद में उन्हें अंदर जाने दिया गया। करीब 10 बजे विजिलेंस प्रमुख शरद सत्य चौहान अपने कार्यालय पहुंचे और बिना कुछ कहे अंदर चले गए। इसी दौरान सेक्टर-23 और एक अन्य स्थान पर भी सीबीआई ने दबिश दी, जहां से 9 लाख रुपए कैश और कई आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद किए। CBI ने गिरफ्तार आरोपी बाप-बेटा और अंकित बधवा को चंडीगढ़ की स्पेशल CBI कोर्ट मे पेश किया। अंकित का रिमांड सीबीआई ने नहीं मांगा। बाप-बेटे का 3 दिन का रिमांड गया। जिसके बाद कोर्ट उन्हें तीन दिन के रिमांड पर भेज दिया। 12 पेजों की वॉट्सऐप चैट कोर्ट के समक्ष पेश की गई। 13 मार्च: 8 फर्जी शिकायतों का खुलासा CBI सूत्रों के मुताबिक दोनों बिचौलिए काफी शातिर थे। जांच में 8 के करीब फर्जी शिकायतों का पता चला। CBI सूत्रों के मुताबिक, बिचौलिए मोहाली के एक गेस्ट हाउस में ठहरे थे, जिसकी बुकिंग भी किसी राजनेता ने करवाई थी। विजिलेंस ने उसकी रिकॉर्डिंग को कब्जे में ले लिया है। वह अफसरों से दोस्ती भी धर्म के आड़ में करते थे। वह जब किसी अफसर से मिलने जाते थे तो कहते थे कि बालाजी सालासर के उपासक हैं। वह अफसरों को प्रशाद व झंडा तक देते थे। इस तरह वह अफसरों के नजदीक जाते थे। इन अफसरों से संपर्क के बाद वह अपना काम करते थे।

   

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