चंडीगढ़ गोशाला में 50 गोवंश की मौत पर हाईकोर्ट सख्त:लगाई प्रशासन को फटकार, कहा-लापरवाह कार्यशाली का नतीजा

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ के रामपुरकलां स्थित गोशाला में गायों समेत करीब 50 गोवंश की मौत के मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए प्रशासन और नगर निगम की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा कि यह पूरा मामला संबधित एजेंसियों की लापरवाही और ढीली कार्यशैली का नतीजा है। कानून लागू कराने के जिम्मेदार अधिकारियों ने सब कुछ जानते हुए भी आंखें बंद रखीं। इसकी वजह से नियमों का खुलेआम उल्लंघन होता रहा और गोवंश को भारी तकलीफ झेलनी पड़ी। मामला जनहित याचिका के रूप में दर्ज हाईकोर्ट के जस्टिस संजय वशिष्ठ ने इस पूरे प्रकरण को जनहित याचिका के रूप में दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने केंद्र सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय और पर्यावरण मंत्रालय के सचिवों के माध्यम से, चंडीगढ़ प्रशासन को डिप्टी कमिश्नर के जरिए और नगर निगम चंडीगढ़ को उसके आयुक्त के माध्यम से नोटिस जारी किया है। साथ ही पूरे मामले की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश भी दिए गए हैं। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि चंडीगढ़ ऐसा शहर है जिसे पंजाब और हरियाणा के बुद्धिजीवियों का प्रमुख केंद्र माना जाता है।इसके बावजूद कानून लागू करने वाली एजेंसियां पूरी तरह निष्क्रिय नजर आईं। अनुशासन बनाए रखने के लिए कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। जिन अधिकारियों पर नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कदम उठाने की जिम्मेदारी थी, उन्होंने जानबूझकर अनदेखी की। इन सभी बातों को देखते हुए जस्टिस संजय वशिष्ठ ने कहा कि यह मामला संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत कोर्ट की विशेष शक्तियों से जुड़ा है। उन्होंने रजिस्ट्री को निर्देश दिए कि मामले को औपचारिक रूप से दर्ज किया जाए, उसे केस नंबर दिया जाए और मीडिया रिपोर्टों के साथ यह आदेश चीफ जस्टिस के सामने रखा जाए। गायों के पेट में मिले पॉलीथिन पर चिंता हाईकोर्ट ने मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि मृत गायों के पोस्टमॉर्टम में कई के पेट से पॉलीथिन और प्लास्टिक कचरा मिला है। प्रारंभिक रिपोर्टों में यही मौत का कारण बताया गया है। कोर्ट ने इस पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि चंडीगढ़ में पॉलीथिन पर प्रतिबंध के बावजूद इसका खुलेआम इस्तेमाल अधिकारियों की ढिलाई को उजागर करता है। जस्टिस वशिष्ठ ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि तथाकथित शिक्षित लोग सब्जियों और खाद्य पदार्थों का कचरा पॉलीथिन में डालकर फेंक देते हैं, जिसे लावारिस पशु खा लेते हैं। यही लापरवाही अंततः उनकी मौत का कारण बनती है और इसके लिए जिम्मेदार एजेंसियां जवाबदेही से नहीं बच सकतीं। निगम के अधीन गोशाला की हालत पर सवाल कोर्ट ने बताया कि यह मामला तब सामने आया, जब मक्खन माजरा स्थित दाह-संस्कार संयंत्र में बड़ी संख्या में गोवंश के शव मिलने की खबरें मीडिया में आईं। रिपोर्टों के अनुसार 14 जनवरी को रामपुरकलां की उस गोशाला में, जो नगर निगम के नियंत्रण में बताई जाती है, रहस्यमय परिस्थितियों में गायों समेत करीब 50 गोवंश मृत पाए गए। अदालत ने यह भी संज्ञान लिया कि रामपुरकलां में 1.79 करोड़ रुपए की लागत से स्थापित कार्कस डिस्पोजल प्लांट, जिसका उद्घाटन 12 सितंबर 2025 को हुआ था और जिसके लिए 5 साल का वार्षिक रखरखाव एग्रीमेंट था, एक सप्ताह से अधिक समय तक बंद पड़ा रहा। इसके चलते शवों का ढेर लग गया और स्थिति और भी भयावह हो गई। जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हाईकोर्ट बोला कुछ समाचारों में यह भी सामने आया कि कई शव क्षत-विक्षत अवस्था में थे, जिनकी आंखें, खुर और सींग गायब थे। इससे अवैध गतिविधियों और तस्करी की आशंका भी जताई गई है।कोर्ट के संज्ञान में यह भी लाया गया कि नगर निगम ने मेडिकल ऑफिसर ऑफ हेल्थ और कैटल पाउंड, रायपुरकलां के एक इंस्पेक्टर को निलंबित किया है। इसके अलावा संविदा पर तैनात पशु चिकित्सक, सेनेटरी इंस्पेक्टर, सुपरवाइजर और अन्य मल्टी-टास्किंग स्टाफ की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। चंडीगढ़ के अतिरिक्त उपायुक्त को पूरे मामले की मजिस्ट्रियल जांच सौंपी गई है।

   

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