चंडीगढ़ ट्रिब्यून चौक फ्लाईओवर पर हाईकोर्ट की रोक:बोला- मास्टर प्लान के खिलाफ निर्माण नहीं हो सकता, अंडरपास पर करें विचार
- DSS Admin
- May 30, 2026
चंडीगढ़ में ट्रिब्यून चौक पर प्रस्तावित फ्लाईओवर परियोजना को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। चीफ जस्टिस शील नागू की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने शुक्रवार को स्पष्ट कर दिया कि दक्षिण मार्ग पर प्रस्तावित फ्लाईओवर का निर्माण चंडीगढ़ मास्टर प्लान-2031 के अनुरूप नहीं है। ऐसे में इसकी अनुमति नहीं दी जा सकती। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि ट्रैफिक समस्या के समाधान के लिए अंडरपास एक स्वीकार्य विकल्प हो सकता है और प्रशासन इस पर विचार कर सकता है। कोर्ट ने प्रशासन से कहा कि विकास कार्यों के दौरान चंडीगढ़ की मूल पहचान और हरियाली को सुरक्षित रखा जाए। शहर का मूल चरित्र बनाए रखना जरूरी खंडपीठ ने कहा कि विशेष रूप से फेज-1 के सेक्टरों और दक्षिण मार्ग क्षेत्र के मूल शहरी स्वरूप को संरक्षित रखना आवश्यक है। बढ़ते ट्रैफिक दबाव से निपटने के लिए निजी वाहनों पर निर्भरता कम करने और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत व विस्तारित करने की जरूरत है। हाईकोर्ट पहले ही इस परियोजना के लिए पेड़ों की कटाई पर रोक लगा चुका है। अदालत ने माना था कि ट्रिब्यून चौक के आसपास लगे आम समेत कई पेड़ 50 वर्ष से अधिक पुराने हैं। फ्लाईओवर निर्माण के लिए इनके कटान या भारी छंटाई की आशंका थी, इसलिए अदालत ने हस्तक्षेप करते हुए इनकी सुरक्षा सुनिश्चित की थी। फ्लाईओवर से बिगड़ेगा शहर का स्वरूप फ्लाईओवर के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता तनु बेदी ने तर्क दिया कि प्रस्तावित परियोजना मास्टर प्लान-2031 के विपरीत है। इससे शहर की नियोजित संरचना, हरित पट्टियां और पैदल यात्रियों के अनुकूल स्वरूप प्रभावित होगा। उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ को पैदल और साइकिल अनुकूल शहर के रूप में विकसित किया गया था। फ्लाईओवर जैसी संरचनाएं न केवल शहर की दृश्य पहचान को प्रभावित करती हैं बल्कि गैर-मोटर चालित परिवहन को भी नुकसान पहुंचाती हैं। उनका कहना था कि निजी वाहनों के लिए लगातार नई सड़क संरचनाएं बनाने से जाम की समस्या खत्म नहीं होती, बल्कि एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित हो जाती है। प्रशासन ने किया था विरोध चंडीगढ़ प्रशासन के वकील अमित झांजी ने कोर्ट में कहा कि मास्टर प्लान-2031 के तहत फ्लाईओवर बनाया जा सकता है। उन्होंने दलील दी कि बढ़ते ट्रैफिक को संभालने के लिए यह परियोजना आवश्यक है। उन्होंने दलील दी कि विरासत क्षेत्र केवल सेक्टर-1 से 30 तक सीमित हैं, पूरा शहर नहीं। साथ ही ट्राइसिटी क्षेत्र के विस्तार और बढ़ती आबादी को देखते हुए अतिरिक्त यातायात ढांचे की आवश्यकता है। हालांकि अदालत ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया और स्पष्ट किया कि प्रस्तावित फ्लाईओवर मास्टर प्लान की भावना के अनुरूप नहीं है। इसलिए फ्लाईओवर के बजाय वैकल्पिक समाधान तलाशे जाने चाहिए।

