ऑस्ट्रेलियाई युवक ओम सतीजा की ‘वन इंडिया रन’ पठानकोट पहुंची:बोले- अनाथ और कुष्ठ रोगी बच्चों के लिए दौड़ रहा हूं; 60 लाख जुटाना लक्ष्य
- DSS Admin
- May 09, 2026
समाज सेवा और राष्ट्रीय एकता का संदेश लेकर कन्याकुमारी से कश्मीर तक की दौड़ पर निकले 23 वर्षीय भारतवंशी ऑस्ट्रेलियाई युवक ओम सतीजा शुक्रवार को पठानकोट पहुंचे। इंडो-ऑस्ट्रेलियाई फिजियोथेरेपिस्ट ओम सतीजा ने अनाथ बच्चों और कुष्ठ रोग से प्रभावित लोगों की मदद के लिए एक अनोखी पहल की है। उन्होंने "वन इंडिया रन" के नाम से कन्याकुमारी से कश्मीर तक 5000 किलोमीटर की दौड़ शुरू की है। वे जरूरतमंद बच्चों के लिए ऑनलाइन फंड जुटाते हैं। अभी तक की दौड़ से वे लगभग 13 लाख रुपए जुटा भी चुके हैं। उनका उद्देश्य 60 लाख रुपए जुटाना है। 4500 किमी. का सफर दौड़ कर किया पूरा कन्याकुमारी से दौड़े ओम शुक्रवार को लगभग 4500 किलोमीटर का सफर तय कर पठानकोट पहुंचे। मीडिया से बात करते हुए ओम सतीजा ने बताया कि उन्होंने यह यात्रा 26 जनवरी 2026 को शुरू की थी। वे रोजाना लगभग 50 किलोमीटर दौड़ते हैं और उनका लक्ष्य 100 दिनों के भीतर अपनी इस 5000 किलोमीटर की ऐतिहासिक दौड़ को पूरा करना है। अनाथ और कुष्ठ रोगी बच्चों को देंगे आर्थिक मदद ओम सतीजा ने बताया कि इस महा-दौड़ का मुख्य उद्देश्य कोलकाता की 'उदयन'संस्था के माध्यम से बेसहारा, अनाथ बच्चों और कुष्ठ रोगियों की आर्थिक मदद करना है। ओम सतीजा चाहते हैं कि लोग इस संस्था के माध्यम से अपना सहयोग दें ताकि जरूरतमंदों के जीवन में सुधार लाया जा सके। मेलबर्न में फिजियोथेरेपिस्ट हैं ओम ओम सतीजा ने कहा कि इस यात्रा से उन्हें एक अलग ही मानसिक सुकून मिल रहा है। वे भारत के युवाओं को फिटनेस और बड़े लक्ष्य हासिल करने के लिए प्रेरित करना चाहते हैं। उनका लक्ष्य भारत की सबसे लंबी दौड़ पूरी करने वाला सबसे कम उम्र का युवा बनना भी है। बता दें कि ओम मेलबर्न (ऑस्ट्रेलिया) में एक फिजियोथेरेपिस्ट हैं। उनके माता-पिता भारतीय हैं। अब ऑस्ट्रेलिया में सैटल हैं। माता-पिता भी डॉक्टर हैं। 800 से अधिक कॉलोनियों में कुष्ट रोगी ज्यादा ओम सतीजा के मुताबिक कुष्ठ रोग एक इलाज योग्य बीमारी होने के बावजूद, भारत में इसे समाज पर कलंक माना जाता है। 2024 में एक लाख से अधिक नए मामले दर्ज किए गए, और देश भर में 800 से अधिक कॉलोनियों में आज भी ऐसे परिवार रहते हैं जो भेदभाव और बहिष्कार का सामना कर रहे हैं। ऋषिकेश यात्रा के दौरान मिला मकसद ओम सतीजा बताते हैं यह उनके बचपन की एक यात्रा थी, जब वे ऋषिकेश के राम झूले गए थे। अपने पिता के साथ जरूरतमंदों को कंबल बांटे थे। उन्होंने बताया कि स्कूल के दिनों में भारत यात्रा के दौरान, ऋषिकेश में मैंने पहली बार कुष्ठ रोग से पीड़ित एक व्यक्ति को देखा था, इस घटना ने उन पर गहरा प्रभाव छोड़ा। कुष्ठ रोग एक ऐसी बीमारी है, जिसके बारे में कोई बात नहीं करता। बहुत से छोटे बच्चे कलंक के साथ जीते हैं और समाज में अवसरों से वंचित रह जाते हैं, इसलिए मैं उनके लिए आवाज बनने के लिए घर से निकला हूं। पैस्को ने सराहा, सहयोग की अपील पठानकोट पहुंचने पर पैस्को (Punjab Ex-Servicemen Corporation) के डिस्ट्रिक्ट कोऑर्डिनेटर इंद्रजीत सिंह की अगुवाई में उनकी टीम ने फूलों के हार पहनाकर ओम सतीजा का जोरदार स्वागत किया। इंद्रजीत सिंह ने ओम की सराहना करते हुए कहा कि हमें बेहद खुशी है कि इतनी कम उम्र का युवक समाज सेवा के लिए रोजाना 50 किलोमीटर दौड़ रहा है। आज के दौर में जहां युवा मोबाइल फोन से बाहर नहीं निकल पा रहे, वहां ओम सतीजा एक बड़ी मिसाल हैं। उन्होंने आम जनता से भी अपील की कि वे ओम के इस नेक मिशन से जुड़ें और बेसहारा लोगों की मदद के लिए आगे आएं।

