चंडीगढ़ में आज से प्रॉपर्टी टैक्स डिफॉल्टरों पर सख्ती:25% पेनल्टी के साथ 12% ब्याज भी देना होगा, 20% छूट योजना खत्म

चंडीगढ़ में प्रॉपर्टी टैक्स जमा नहीं करने वाले संपत्ति मालिकों पर आज (1 जून) से नगर निगम ने सख्ती शुरू कर दी। 31 मई तक मिलने वाली टैक्स छूट योजना समाप्त होने के बाद अब बकायेदारों को 25 प्रतिशत पेनल्टी के साथ 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी चुकाना होगा। इसके अलावा रिहायशी संपत्तियों पर मिलने वाली 20 प्रतिशत और व्यावसायिक संपत्तियों पर 10 प्रतिशत की छूट का लाभ भी अब नहीं मिलेगा। नगर निगम के अनुसार, 1 अप्रैल से 31 मई तक चली छूट योजना के दौरान करीब 65 हजार करदाताओं ने अपना प्रॉपर्टी टैक्स जमा कराया। इस अवधि में निगम को लगभग 50 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ है। छुट्टी के दिन टैक्स जमा कराने पहुंचे लोग छूट योजना के अंतिम दिन रविवार को अवकाश होने के बावजूद बड़ी संख्या में करदाता संपर्क केंद्रों और नगर निगम कार्यालय पहुंचे। हालांकि अभी भी हजारों ऐसे संपत्ति मालिक हैं जिन्होंने अपना प्रॉपर्टी टैक्स जमा नहीं कराया है। निगम अब ऐसे बकायेदारों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी में है। 90 करोड़ के लक्ष्य से अभी दूर निगम नगर निगम ने चालू वित्त वर्ष में प्रॉपर्टी टैक्स से 90 करोड़ रुपए जुटाने का लक्ष्य रखा है। पिछले वित्त वर्ष में निगम ने 87.91 करोड़ रुपए का टैक्स संग्रह किया था। इसमें पीजीआई, पंजाब यूनिवर्सिटी और रेलवे सहित कई संस्थानों से पिछले वर्षों का बकाया टैक्स भी शामिल था। अधिकारियों का कहना है कि इस वर्ष पिछले साल की तुलना में एरियर की राशि कम आने की संभावना है, जिससे लक्ष्य हासिल करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। हालांकि शुरुआती दो महीनों में 50 करोड़ रुपए की वसूली को सकारात्मक माना जा रहा है। 1.20 लाख संपत्ति मालिकों को भेजे गए नोटिस प्रॉपर्टी टैक्स वसूली बढ़ाने के लिए नगर निगम ने करीब 1.20 लाख संपत्ति मालिकों को नोटिस जारी किए थे। शहर में कुल 1.42 लाख करदाता हैं, जिनमें लगभग 1.12 लाख रिहायशी और 30 हजार व्यावसायिक संपत्तियों के मालिक शामिल हैं। नगर निगम ने स्पष्ट किया है कि टैक्स नहीं चुकाने वालों के खिलाफ चरणबद्ध कार्रवाई की जाएगी। सबसे पहले 50 हजार रुपए से अधिक टैक्स बकाया रखने वालों को नोटिस भेजे जाएंगे। इसके बाद 30 हजार और फिर 20 हजार रुपए से अधिक बकाया वाले डिफॉल्टरों पर कार्रवाई होगी। पिछले वर्ष निगम ने कई मामलों में पानी के कनेक्शन काटने और संपत्तियां अटैच करने जैसी कार्रवाई की थी। इस बार भी टैक्स वसूली के लिए ऐसे कड़े कदम उठाए जा सकते हैं। अधिकारियों का कहना है कि प्रॉपर्टी टैक्स नगर निगम के राजस्व का प्रमुख स्रोत है और बकायेदारों के खिलाफ नियमों के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।

   

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