पतंजलि का शोध: दालचीनी में छिपा है मधुमेह नियंत्रण का प्राकृतिक सूत्र,अमेरिकी जर्नल ने स्वीकारा
- DSS Admin
- May 13, 2026
हरिद्वार, 13 मई (हि.स.)। पतंजलि के वैज्ञानिकों की दिन-रात की मेहनत एक बार फिर वैश्विक स्तर पर चमक बिखेर रही है। पतंजलि के वैज्ञानिकों की ओर से दालचीनी को लेकर किए जा रहे अनुसंधान को अमेरिका के प्रसिद्ध जर्नल एल्सवियर के फूड रिसर्च इंटरनेशनल ने न केवल स्वीकार किया है अपितु इस बात पर भी मुहर लगा दी है कि दालचीनी में मिलने वाले जैव सक्रिय तत्व से मधुमेह जैसी गंभीर बीमारी को भी नियंत्रित किया जा सकता है। यह शोध वैश्विक स्तर पर आयुर्वेद को जहां बड़ा बल देती है, वहीं, मधुमेह के इलाज में दालचीनी की भूमिका को लेकर इलाज के नये आयाम खोल देती है।
हजारों साल पहले से ऋषि कहते आ रहे हैं कि दालचीनी वायु व पित्त का हरण करके शुक्र और बल के रूप को बढ़ाने वाला होता है। वैसे भी हम दालचीनी के गुणों को वर्षों से जानते और समझते आ रहे हैं, लेकिन जो पतंजलि के वैज्ञानिकों के पुरुषार्थ से वैश्विक स्तर पर निकलकर सामने आया है और जिसे विज्ञान ने अब मान्यता दे दी है, वह आयुर्वेद में मील का पत्थर साबित होगा।
दरअसल, दालचीनी को लेकर पतंजलि के वैज्ञानिक लंबे समय से अनुसंधान कर रहे थे। अनुसंधान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद सभी प्रमाणिक तथ्यों को अमेरिका के प्रसिद्ध जर्नल एल्सवियर के फूड रिसर्च इंटरनेशनल को भेजा गया। जहां उन्होंने न केवल पतंजलि के रिसर्च को स्वीकार किया बल्कि उस तथ्य को भी माना, जिसमें पतंजलि के वैज्ञानिकों ने रिसर्च में दालचीनी से मधुमेह नियंत्रण की बात कही। अंतर्राष्ट्रीय जर्नल ने दालचीनी के जैव सक्रिय तत्वों (बायो एवैलेबिलिटी) व मधुमेह के नियंत्रण में उसकी भूमिका (हाइपोग्लाइसेमिक) व विभिन्न खाद्य पदार्थों के साथ प्रयोग करने पर उसकी प्रभावशीलता के संदर्भ में पतंजलि की ओर से किए गए अनुसंधान को स्वीकार किया है।
पतंजलि के वैज्ञानिकों ने दालचीनी के विविध खाद्यान्न के साथ व स्वतंत्र व सुरक्षित उपयोग से संबंधित वैज्ञानिक पहलुओं का विस्तृत विश्लेषण किया गया। जिसका प्रथम बार विश्व के प्रसिद्ध जर्नल ने स्वीकार किया। बता दें कि फूड रिसर्च इंटरनेशनल जर्नल खाद्य विज्ञान और पोषण के क्षेत्र की विश्व स्तर की शोध पत्रिका है। इसमें खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता, पोषण, जैव सक्रिय तत्व, स्वास्थ्य प्रभाव और खाद्य तकनीक से जुड़े शोध प्रकाशित होते हैं। इस जर्नल में शोध प्रकाशित होना वैज्ञानिक समुदाय में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जाता है क्योंकि यहां प्रकाशित शोध कठोर रिव्यू प्रक्रिया से गुजरते हैं।
आचार्य बालकृष्ण का कहना है कि हमारा उद्देश्य केवल शोध करना नहीं, बल्कि ऐसे परिणाम देना है जो मानव जीवन की गंभीर बीमारियों में प्राकृतिक समाधान प्रस्तुत कर सकें। दालचीनी पर यह अध्ययन उसी दिशा में एक मजबूत कदम है। प्रकृति में ही स्वास्थ्य का संपूर्ण समाधान निहित है, और आयुर्वेद उसी प्रकृति के नियमों को विज्ञान की भाषा में प्रस्तुत करता है। दालचीनी पर हुआ यह शोध उसी सत्य को पुनः स्थापित करता है।

