योल वेद मन्दिर में यज्ञानुष्ठान का 74वां दिन-अग्निहोत्र से निरोगी जीवन और दीर्घायु का संदेश

74th day of Yagyanushthan in Yol Veda Temple - Message of healthy life and longevity from Agnihotra


कठुआ, 24 जून । वेद मन्दिर योल में चल रहे 78 दिवसीय चारों वेदों के यज्ञानुष्ठान के 74वें दिन स्वामी राम स्वरूप जी योगाचार्य ने जिज्ञासुओं को अथर्ववेद काण्ड 20, सूक्त 96 के मंत्रों का महत्व समझाते हुए आध्यात्मिक मार्गदर्शन दिया।

अपने प्रवचन में उन्होंने कहा कि मनुष्य को चाहे कितने भी रोग क्यों न हों यदि वह श्रद्धा और विधि-विधान से वेदमंत्रों के साथ अग्निहोत्र में घृत एवं हवन सामग्री की आहुति देता है तो उससे न केवल उसका स्वयं का बल्कि समाज के हजारों लोगों का भी कल्याण होता है।

स्वामी जी ने वेदवाक्य “शतम् शरद वर्धमान” का उल्लेख करते हुए बताया कि अग्निहोत्र और यज्ञ के माध्यम से मनुष्य अपनी आयु को बढ़ाकर सौ शरद ऋतुओं तक स्वस्थ जीवन व्यतीत कर सकता है। उन्होंने कहा कि यज्ञ से रोगों का नाश होता है और जिज्ञासु दीर्घायु प्राप्त करता है। उन्होंने आगे कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को किसी विद्वान के सान्निध्य में वेदों का श्रवण करना चाहिए और वेदमंत्रों का ज्ञान प्राप्त कर जीवन में यज्ञ एवं अग्निहोत्र को अपनाना चाहिए जिससे पूर्ण निरोगी जीवन संभव हो सके।

अथर्ववेद के मंत्र 20/96/13 का संदर्भ देते हुए उन्होंने बताया कि अग्निहोत्र का प्रभाव इतना व्यापक है कि यह गर्भ में पल रहे शिशु के रोगों के नाश में भी सहायक माना गया है। अंत में स्वामी राम स्वरूप जी ने सभी से आह्वान किया कि वे ईश्वर प्रदत्त वेदविद्या का स्वाध्याय करें और यज्ञ-अग्निहोत्र को अपने जीवन का अभिन्न अंग बनाएं ताकि रोगों और कष्टों से मुक्त होकर स्वस्थ, सुखमय और दीर्घ जीवन प्राप्त किया जा सके।

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