फीस वृद्धि के विरोध में अभाविप का प्रदर्शन जारी, जम्मू विश्वविद्यालय प्रशासन से फैसले पर पुनर्विचार की मांग
- Neha Gupta
- Jun 21, 2026

जम्मू, 21 जून । अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) जम्मू विश्वविद्यालय इकाई ने रविवार को एक प्रेस वार्ता आयोजित कर विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा हाल ही में की गई फीस वृद्धि तथा प्रतिवर्ष 10 प्रतिशत शुल्क बढ़ाने के प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया। एबीवीपी ने इसे छात्र विरोधी निर्णय बताते हुए तत्काल वापस लेने की मांग की। प्रेस वार्ता में संगठन के पदाधिकारियों ने बताया कि फीस वृद्धि के खिलाफ छात्र पिछले पांच दिनों और चार रातों से लगातार अनिश्चितकालीन दिन-रात धरना दे रहे हैं। उनका कहना है कि बढ़ी हुई फीस का सबसे अधिक असर मध्यम वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आने वाले विद्यार्थियों पर पड़ेगा।
अभाविप जम्मू-कश्मीर-लद्दाख के प्रदेश सचिव सनक श्रीवत्स ने कहा कि लगातार विरोध और ज्ञापन देने के बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों की वास्तविक चिंताओं को दूर करने में विफल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन फीस वृद्धि के पीछे कोई संतोषजनक और तार्किक कारण प्रस्तुत नहीं कर पाया है। उन्होंने संशोधित शुल्क संरचना को तुरंत वापस लेने और छात्र प्रतिनिधियों के साथ सार्थक संवाद शुरू करने की मांग की।
जम्मू विश्वविद्यालय इकाई के अध्यक्ष अमित सदोत्रा ने कहा कि छात्र शांतिपूर्ण ढंग से दिन-रात धरना देकर अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन केवल फीस वृद्धि के खिलाफ नहीं बल्कि प्रत्येक छात्र के सस्ती और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अधिकार की रक्षा के लिए है। उन्होंने फीस संशोधन की प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग भी की। इकाई की सचिव जयवर्धनी सिंह परिहार ने कहा कि शिक्षा हर छात्र के लिए सुलभ रहनी चाहिए चाहे उसकी आर्थिक स्थिति कैसी भी हो। उन्होंने “वन कोर्स-वन फीस” नीति लागू करने की मांग दोहराते हुए कहा कि सभी छात्रों के साथ समान और निष्पक्ष व्यवहार सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
एबीवीपी ने अपनी प्रमुख मांगों में 10 प्रतिशत फीस वृद्धि नीति को वापस लेने, छात्रों को दो किस्तों में फीस जमा करने की सुविधा देने, छात्रवृत्ति कोष और लाभार्थियों की संख्या बढ़ाने तथा बीपीएल एवं आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए विशेष रियायतें लागू करने की मांग रखी। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों की मांगों की अनदेखी करता रहा तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। एबीवीपी नेताओं ने कहा कि छात्रों के हितों की रक्षा और उनकी समस्याओं के समाधान तक संघर्ष जारी रहेगा।

