जनसहयोग से अलवर के मुख्य बस स्टैंड पर स्थापित हुआ नया ट्रैफिक बूथ

अलवर. बूथ का उद्घाटन करते पुलिस अधिकारी व अन्य।

अलवर, 02 जुलाई (हि.स.)। अलवर शहर में यातायात व्यवस्था को अधिक सुव्यवस्थित और सुरक्षित बनाने की दिशा में जनसहयोग से एक और पहल की गई है। शहर के मुख्य बस स्टैंड पर सीबा मसाला उद्योग के सहयोग से निर्मित नए ट्रैफिक बूथ का बुधवार को उद्घाटन किया गया। बूथ का उद्घाटन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (मुख्यालय) डॉ. दीपक कुमार शर्मा की उपस्थिति में उद्योगपति एवं सीबा मसाला उद्योग के डायरेक्टर शशांक झालानी ने फीता काटकर किया।

इस अवसर पर ट्रैफिक इंचार्ज संजय शर्मा, ग्रामीण थाना प्रभारी राजेश चौधरी सहित पुलिस विभाग के अधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता, व्यापारी एवं बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान शहर के विकास में सामाजिक भागीदारी और जनसहयोग की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (मुख्यालय) डॉ. दीपक कुमार शर्मा ने कहा कि जनसहयोग से किए गए ऐसे कार्य समाज के लिए प्रेरणादायक होते हैं। उन्होंने कहा कि जब नागरिक प्रशासन के साथ मिलकर सार्वजनिक सुविधाओं के विकास में सहयोग करते हैं तो इससे शहर के विकास को नई गति मिलती है और अन्य लोग भी समाजहित के कार्यों के लिए प्रेरित होते हैं। उन्होंने कहा कि यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने में इस प्रकार के ट्रैफिक बूथ उपयोगी साबित होंगे।

सीबा मसाला उद्योग के डायरेक्टर शशांक झालानी ने कहा कि अलवर ने उन्हें और उनके परिवार को बहुत कुछ दिया है। ऐसे में शहर के विकास और जनसुविधाओं के विस्तार में योगदान देना उनका सामाजिक दायित्व है। उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक सक्षम नागरिक अपनी सामर्थ्य के अनुसार शहर के लिए कुछ सकारात्मक कार्य करे तो अलवर को अधिक सुंदर, सुरक्षित और व्यवस्थित बनाया जा सकता है। समाज के लिए किया गया प्रत्येक छोटा प्रयास भी बड़े बदलाव का आधार बन सकता है।

उल्लेखनीय है कि यह पहला अवसर नहीं है जब शशांक झालानी ने जनहित के किसी कार्य में सहयोग दिया हो। इससे पहले उन्होंने शहर के ऐतिहासिक घंटाघर के सौंदर्यीकरण में योगदान दिया था। वहीं एसएमडी स्कूल के निकट खुले नाले में लगातार हो रही दुर्घटनाओं को देखते हुए अपने सहयोग से वहां लोहे का सुरक्षा जाल भी लगवाया था, जिससे हादसों की आशंका काफी हद तक कम हुई। शशांक झालानी विभिन्न धार्मिक, सामाजिक और सेवा कार्यों में भी सक्रिय रूप से जुड़े रहे हैं। वे शहर के कई सामाजिक एवं व्यापारिक संगठनों में विभिन्न दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं। उनके परिवार की समाजसेवा की परंपरा भी लंबे समय से रही है। उनके पिता बाबूलाल झालानी भी वर्षों से विभिन्न सामाजिक गतिविधियों और जनसेवा के कार्यों से जुड़े रहे हैं, जिसका प्रभाव शशांक झालानी के कार्यों में भी दिखाई देता है।

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