मकान टूटने की चिंता, तालाब सुंदरीकरण कार्य के प्रस्ताव को रद्द करने की मांग

धमतरी, 03 जुलाई (हि.स.)। गांव के तालाब में सुंदरीकरण कार्य को रोकने व तालाब पार को आबादी भूमि घोषित करने की मांग को लेकर जिला पंचायत सदस्य, जनपद पंचायत सदस्य समेत ग्रामीणों की भीड़ कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचे। कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगे शीघ्र पूरा करने की मांग ग्रामीणों ने की है।

तालाब सुंदरीकरण कार्य से ग्रामीणों को उनके सालों से निर्मित घरों के टूटने का डर सता रही है, क्योंकि इस कार्य के लिए पटवारी व अन्य कर्मचारियों की टीम पूर्व में नापजोख करने गांव पहुंच चुके हैं।

जिला पंचायत सदस्य धनेश्वरी साहू, जनपद पंचायत सदस्य कीर्तन मीनपाल, सरपंच रत्नाबांधा फकीरचंद वर्मा समेत ग्रामीण रामसिंह मंडावी, कमलेश नाग, दिलीप कुमार, तीर्थराज, कुलेश्वरी साहू, अशोक राम, हेमलता, सत्यनारायण, संतोष कुमार, अंजली नाग, चंद्रिका नाग, पवन कुमार मीनपाल, ज्योति मीनपाल, उमा बाई, शशिकला आदि ग्रामीणों की भीड़ तीन जुलाई को कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचे। कलेक्टर के नाम सौंपे ज्ञापन में ग्रामीणों ने कहा कि तालाब किनारे करीब डेढ़ से 200 ग्रामीण मकान बनाकर सालों से बसे हुए है और जीवनयापन कर रहे हैं। लंबे समय से तालाब किनारे के कई खसरा के जमीन को शासन-प्रशासन से लगातार आवेदन देकर आबादी जमीन घोषित करने की मांग कर रहे हैं, क्योंकि वे यहां पक्का मकान बनाकर रह रहे हैं। उनकी मांगे शासन स्तर से प्रकि्रया में है, इस बीच गांव के तालाब पार पर सुंदरीकरण कार्य होने की जानकारी ग्रामीणों को हुई।

तालाब पार पर सुंदरीकरण कार्य के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है, जो स्वीकृत भी हो सकता है। कुछ ग्रामीणों का कहना है कि प्रस्ताव भेजने के बाद इन ग्रामीणों के घरों की नापजोख की जा रही है, ऐसे में ग्रामीणों को उनके सालों से काबिज मकानों के टूटने की चिंता है। साथ ही यदि शासन इस प्रस्ताव पर कार्य प्रारंभ करता है, तो आबादी घोषित करने की प्रकि्रया प्रभावित होगी और ग्रामीणों के हितों को क्षति पहुंचने की आशंका है। इसे ध्यान में रखते हुए सभी ग्रामीण चाहते हैं कि तालाब सुंदरीकरण कार्य के प्रस्ताव को तत्काल रद्द किया जाएग, ताकि तालाब किनारे किसी तरह के कार्य न हो। तालाब सुंदरीकरण कार्य को तत्काल प्रभाव से ग्रामीणों ने रोकने की मांग शासन-प्रशासन से की है। ग्रामीणों की मांग है कि उनके द्वारा आवेदन पर अंकित खसरा नंबर को तत्काल आबादी जमीन घोषित करें, ताकि ग्रामीणों को जमीन का अधिकार मिल सके।

   

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