फसल विविधीकरण से बदलेगी खेती की तस्वीर, किसानों को मिलेगा 15 हजार रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि

धमतरी, 10 जून (हि.स.)। प्रदेश के किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को अधिक लाभकारी एवं टिकाऊ बनाने की दिशा में राज्य शासन ने बड़ा कदम उठाया है। मंत्रिपरिषद ने खरीफ वर्ष 2026 से कृषक उन्नति योजना के नए स्वरूप को मंजूरी दे दी है। अब धान के स्थान पर दलहन, तिलहन, मक्का, कोदो, कुटकी, रागी और कपास जैसी वैकल्पिक खरीफ फसलों की खेती करने वाले किसानों को 15 हजार रुपये प्रति एकड़ आदान सहायता प्रदान की जाएगी।

इससे पहले यह राशि 10 हजार रुपये प्रति एकड़ थी। लंबे समय से प्रदेश में धान आधारित खेती का वर्चस्व रहा है, लेकिन बदलती जलवायु परिस्थितियों, भूजल संरक्षण की आवश्यकता और किसानों की आय में वृद्धि के लक्ष्य को देखते हुए फसल विविधीकरण को बढ़ावा देना समय की जरूरत माना जा रहा है। नई व्यवस्था किसानों को बाजार की मांग और बेहतर लाभ वाली फसलों की ओर आकर्षित करेगी। धमतरी जिले में इस पहल के सकारात्मक परिणाम पहले ही सामने आ चुके हैं। खरीफ वर्ष 2025-26 के दौरान योजना के तहत अन्य फसलों की खेती करने वाले 1,402 किसानों को 229.69 हेक्टेयर क्षेत्र के लिए 56.82 लाख रुपये से अधिक की आदान सहायता राशि प्रदान की गई। इससे किसानों का रुझान वैकल्पिक फसलों की ओर बढ़ा है और उनकी कृषि आय में भी सुधार दर्ज किया गया है।

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार दलहन और तिलहन जैसी फसलें भूमि की उर्वरता बनाए रखने में सहायक होती है तथा इनमें पानी की आवश्यकता भी अपेक्षाकृत कम होती है। इससे जल संरक्षण को बढ़ावा मिलने के साथ उत्पादन लागत में कमी आती है और किसानों को अतिरिक्त आय के अवसर प्राप्त होते हैं। योजना का लाभ एकीकृत किसान पोर्टल, एग्रीस्टैक पंजीयन और डिजिटल क्रॉप सर्वे के आधार पर दिया जाएगा, जिसके लिए किसानों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार पंजीयन कर अपनी फसल संबंधी जानकारी दर्ज करानी होगी।

राज्य शासन का यह निर्णय केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि कृषि के संतुलित विकास, खाद्य एवं पोषण सुरक्षा को मजबूत करने, जल संसाधनों के संरक्षण और किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इससे प्रदेश में खेती को नई दिशा मिलेगी और किसान पारंपरिक धान उत्पादन के साथ-साथ अधिक लाभकारी एवं विविध फसलों की खेती की ओर तेजी से अग्रसर हो सकेंगे।

   

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