मुंबई, 19 मई (हि.स.)। पेट्रोल-डीजल के बढ़ते संकट के बीच राज्य सरकार ने मुंबई के गेटवे ऑफ इंडिया इलाके में चलने वाली डीजल की नौकाओं को चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक बोट में बदलने का निर्णय लिया है। इसके लिए एक विशेष नीति बनाई जाएगी। पहले चरण में प्रयोग के तौर पर 5 लोगों को इलेक्ट्रिक बोट दी जाएगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फ्यूल इकॉनमी और ग्रीन एनवायरनमेंट की अपील का प्रतिसाद देखने को मिल रहा है। मत्स्य पालन व बंदरगाह विकास मंत्री नितेश राणे ने मंगलवार को मुंबई बैंक के चेयरमैन और एमएलसी प्रवीण दरेकर के साथ बैठक की। इस बैठक में गेटवे ऑफ इंडिया इलाके में डीजल से चलने वाली नौकाओं को धीरे-धीरे इलेक्ट्रिक बोट में बदला जा सके, इसलिए बोट मालिकों को आर्थिक मदद और खास लोन स्कीम देने के संबंध में विस्तृत चर्चा की गई।
मंत्री राणे ने बताया कि वर्तमान में गेटवे इलाके में 97 लाइसेंस वाली लकड़ी की नौकाएं चल रही हैं। ये नौकाएं डीजल से चलती हैं, इसलिए बोट मालिकों को हर महीने फ्यूल पर लगभग 1 लाख रुपये खर्च करना पड़ता है। इको-फ्रेंडली टूरिज्म को बढ़ावा देने और बोट मालिकों के खर्चे कम करने के मकसद से पैसेंजर और फिशिंग बोट्स को इलेक्ट्रिक बोट्स में बदलने के लिए एक खास स्कीम लागू करने की ज़रूरत है।
मंत्री नितेश राणे के अनुसार इलेक्ट्रिक बोट की कीमत लगभग 2.5 करोड़ रुपये से 6 करोड़ रुपये है। मुंबई बैंक को मछली पालन करने वाले संगठनों, प्राइवेट बोट मालिकों, व्यक्तिगत लाभार्थियों के लिए कम ब्याज दर पर खास लोन स्कीम देने के लिए एक अलग नीति तैयार करनी चाहिए। इससे लोगों के लिए कोऑपरेटिव का सदस्य बनना या स्वतंत्र संगठन बनाना आसान हो जाएगा। इससे लोगों को अलग-अलग सरकारी योजनाओं और सब्सिडी का फायदा उठाना आसान हो जाएगा।
इस पहल के शुरुआती चरण में, 25 लाभार्थियों को प्राथमिकता दी जाएगी और उनमें से पहले 5 को पायलट बेसिस पर इलेक्ट्रिक बोट दी जानी चाहिए। प्रवीण दरेकर ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि मुंबई बैंक को इलेक्ट्रिक बोट के लिए एक खास नीति तैयार करनी चाहिए। इसे आने वाली बोर्ड मीटिंग में मंजूरी के लिए प्रस्तुत करना चाहिए।
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