विरासत से अतिक्रमण हटाने पर तेज हुई सियासत, बचाव में आए कांग्रेस नेता बोले पीढ़ियों से बसे परिवारों पर प्रहार

चित्तौड़गढ़, 23 जून (हि.स.)। विश्व धरोहर चित्तौड़ दुर्ग पर चिन्हित 209 अवैध अतिक्रमणों को हटाने की प्रशासनिक तैयारी के बीच मामला राजनीतिक रंग लेता जा रहा है। प्रशासन और पुरातत्व विभाग इसे धरोहर की सुरक्षा के लिए जरूरी बता रहे हैं, वहीं कांग्रेस ने इसे वर्षों से बसे परिवारों के अधिकारों पर हमला बताया है। दोनों दलों के जनप्रतिनिधि अपने-अपने समर्थकों के निर्माण बचाने में जुटे हैं। गौरतलब है कि हाल ही में प्रशासन ने दुर्ग क्षेत्र में दो निर्माणाधीन भवनों को ध्वस्त किया था। अब 209 व्यावसायिक और आवासीय निर्माणों को अतिक्रमण की श्रेणी में चिन्हित किया गया है। सूत्रों के अनुसार इनको लेकर उच्च स्तर पर पत्राचार भी किया गया है। ऐसे में मंगलवार को शहर ब्लॉक कांग्रेस कमेटी ने वार्ड संख्या 43 के निवासियों के पक्ष में मोर्चा खोलते हुए कार्रवाई रोकने की मांग की।

ज्ञापन के दौरान पूर्व विधायक सुरेंद्र सिंह जाड़ावत ने आरोप लगाया कि दुर्ग क्षेत्र में परिवार पीढ़ियों से पैतृक भवनों में रह रहे हैं और कई भवनों की मरम्मत स्थानीय जरूरतों के अनुसार होती रही है। जाड़ावत ने कहा कि पुरातत्व विभाग ने वर्षों तक दोहरा रवैया अपनाया—एक तरफ निर्माण सामग्री आने दी गई, दूसरी तरफ नोटिस जारी कर दिए गए। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि निर्माण अवैध थे तो वर्षों तक इन्हें बढ़ने क्यों दिया गया? बिना वैकल्पिक व्यवस्था के मकानों पर बुलडोजर चलाना मानवीय दृष्टि से उचित नहीं है। ज्ञापन के दौरान कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष भैरूलाल चौधरी, वरिष्ठ नेता प्रेम प्रकाश मूंदड़ा, ग्रामीण अध्यक्ष विक्रम जाट, पूर्व सभापति रमेशनाथ, जिला उपाध्यक्ष नगेन्द्रसिंह राठौड़, गोविंद शर्मा, बालमुकुंद मालीवाल, जिला महामंत्री प्रमोद सिंह तंवर, सुरेन्द्रनाथ योगी, महावीर सिंह डेलवास आदि मौजूद रहे।

लेकिन धरोहर बचाना ज्यादा जरूरी

दूसरी ओर विशेषज्ञों का मानना है कि चित्तौड़ दुर्ग यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल है। यदि अनियंत्रित निर्माण और व्यावसायिक गतिविधियों पर रोक नहीं लगी तो दुर्ग की ऐतिहासिक पहचान और मूल स्वरूप को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। ऐसे में पुरातत्व विभाग और प्रशासन पर विरासत संरक्षण की जिम्मेदारी भी है।

---------------

   

सम्बंधित खबर