कांगड़ा लघु चित्रकला विश्व की श्रेष्ठ कला परंपराओं में शामिल, संरक्षण जरूरी : राज्यपाल कविंद्र गुप्ता
- DSS Admin
- Jun 19, 2026
शिमला, 19 जून (हि.स.)। शिमला स्थित भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान (राष्ट्रपति निवास) में शुक्रवार को आयोजित कांगड़ा लघु चित्रकला प्रदर्शनी के उद्घाटन अवसर पर राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने कहा कि कांगड़ा लघु चित्रकला भारतीय चित्रकला की महान परंपराओं में एक विशिष्ट स्थान रखती है और यह विश्व की श्रेष्ठ कला परंपराओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि इस अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण और संवर्धन आवश्यक है, ताकि इसे आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंचाया जा सके।
राज्यपाल ‘कांगड़ा लघुचित्रों में लोक और ग्राम्य जीवन का चित्रण: भारतीय देशज कला-परंपरा का परिप्रेक्ष्य’ विषय पर आयोजित पांच दिवसीय कला शिविर में तैयार कृतियों की प्रदर्शनी का उद्घाटन करने के बाद संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भारत विश्व की सबसे प्राचीन सभ्यताओं में से एक है, जिसकी कला परंपरा हजारों वर्षों से निरंतर विकसित होती रही है। समय के साथ कला के स्वरूप बदले हैं, लेकिन भारतीय कला ने अपनी मौलिक पहचान हमेशा बनाए रखी है।
कविंद्र गुप्ता ने कहा कि कांगड़ा लघु चित्रकला पहाड़ी चित्रकला शैली की उत्कृष्ट अभिव्यक्ति है, जिसने राजा संसार चंद के संरक्षण में अपने उत्कर्ष को प्राप्त किया। इसकी कोमल रेखाएं, सूक्ष्म तूलिका कार्य, रंगों का संतुलित प्रयोग, प्राकृतिक दृश्यों का सुंदर चित्रण और मानवीय भावनाओं की प्रभावशाली अभिव्यक्ति इसे विशेष बनाती है। यही विशेषताएं इसे विश्वस्तरीय कला परंपराओं की श्रेणी में स्थान दिलाती हैं।
उन्होंने कहा कि आधुनिकता और बदलती जीवनशैली के दौर में अनेक पारंपरिक कला रूप चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। ऐसे समय में इन कलाओं को जीवित रखने वाले कलाकार हमारी सांस्कृतिक विरासत के सच्चे संरक्षक हैं। संरक्षण का अर्थ केवल पुरानी कलाकृतियों को सुरक्षित रखना नहीं, बल्कि उन कलाकारों और समुदायों को भी सशक्त बनाना है जो इन परंपराओं को आगे बढ़ा रहे हैं।
राज्यपाल ने कहा कि किसी भी सभ्यता की पहचान केवल उसकी आर्थिक प्रगति से नहीं, बल्कि उसकी सांस्कृतिक गुणवत्ता और रचनात्मक चेतना से होती है। उन्होंने इस प्रदर्शनी को भारत की जीवंत सांस्कृतिक विरासत का उत्सव बताते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन समाज को अपनी जड़ों और परंपराओं से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं।
इस अवसर पर भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान के निदेशक प्रो. हिमांशु चतुर्वेदी ने राज्यपाल का स्वागत किया और संस्थान की गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि संस्थान कला, संस्कृति और भाषा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है तथा पारंपरिक कलाओं के संरक्षण के उद्देश्य से इस कला शिविर का आयोजन किया गया।
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