गुरुग्राम: आईवीएफ से जन्मीं जुड़वां बेटियों का दंपत्ति से डीएनए नहीं हुआ मैच

जुड़वां बच्चों के साथ दंपत्ति राहुल और मीनू राठौर।


बच्चों की अदला-बदली का आराेप गुरुग्राम, 10 जून । गुरुग्राम के एक दंपती ने दिल्ली के द्वारका स्थित आईवीएफ सेंटर पर बच्चों की अदला-बदली का गंभीर आरोप लगाया है। डीएनए टेस्ट में बच्चियों का बायोलॉजिकल मैच ना तो मां से हुआ और नना ही पिता से। इस मामले में पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई जा चुकी है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो रही। दंपत्ति पिछले पांच महीने से न्याय के लिए भटक रहा है।

जानकारी के अनुसार यहां के सेक्टर-111 स्थित पुरी डिप्लोमेटिक ग्रीन्स सोसाइटी में रहने वाले राहुल और मीनू राठौर के यहां जनवरी 2026 में आईवीएफ तकनीक से दो जुड़वां बेटियों हुईं। परिवार और रिश्तेदारों ने देखा कि बच्चियों की शक्ल-सूरत ना तो उनके माता-पिता से मिलती है और ना ही या परिवार के किसी अन्य सदस्य से मिलती है। इस पर शक हो गया। दंपत्ति ने दो अलग-अलग लैब से डीएनए टेस्ट कराया। रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि दोनों बच्चियों का बायोलॉजिकल मैच माता-पिता से जीरो प्रतिशत है। यानी उनका डीएनए दंपत्ति से मैच नहीं हुआ। बच्चियां राहुल और मीनू की जैविक संतान नहीं हैं।

राहुल ने बताया कि उन्होंने दिसंबर 2024 में दिल्ली के ग्रेटर कैलाश स्थित आईवीएफ सेंटर से ट्रीटमेंट शुरू कराया था। डॉक्टरों और अस्पताल प्रबंधन ने भरोसा दिलाया था कि प्रक्रिया में सिर्फ उन्हीं के स्पर्म और पत्नी के एग्स का इस्तेमाल होगा। डिलीवरी के लिए सेंटर ने उन्हें द्वारका के एक प्राइवेट अस्पताल भेजा, जहां जनवरी 2026 में बेटियों का जन्म हुआ। डीएनए रिपोर्ट आने के बाद उन्होंने आईवीएफ सेंटर व डिलीवरी सेंटर से संपर्क किया। दोनों ने गलती मानने की बजाय उन पर ही आरोप लगाने शुरू कर दिए। इसके बाद दंपती ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय, प्रधानमंत्री कार्यालय, राष्ट्रीय महिला आयोग और पुलिस को शिकायत दी, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया। साकेत कोर्ट के आदेश पर दो महीने पहले ग्रेटर कैलाश थाना पुलिस ने केस दर्ज किया। दो महीने बीतने के बाद भी ग्रेटर कैलाश पुलिस ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है।

राहुल और मीनू ने मांग की है कि आईवीएफ सेंटर के सीसीटीवी फुटेज, इलेक्ट्रॉनिक डेटाबेस, सर्वर लॉग और एम्ब्रियो लॉग की फॉरेंसिक जांच कराई जाए। जब तक साइबर एक्सपट्र्स से रिकॉड्र्स की जांच नहीं होगी, तब तक सच्चाई सामने नहीं आएगी। आरोप है कि आदेश के बावजूद अस्पताल ने कोर्ट में पूरे दस्तावेज दाखिल नहीं किए हैं। पीडि़त दंपत्ति ने सोशल मीडिया के माध्यम से भी न्याय की गुहार लगाई है। उन्होंने कहा है कि किसी दंपत्ति के वर्ष 2025 में इसी सेंटर से आईवीएफ कराया है या फिर पांच जनवरी 2026 को बच्चा पैदा हुआ है तो वे भी डीएनए टेस्ट करवा लें।

   

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