हिमाचल में तबादलों पर सुक्खू सरकार की सख्ती, सीधे कोर्ट जाने वाले कर्मचारियों पर होगी कार्रवाई

शिमला, 18 मई (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों के तबादलों को लेकर चलने वाले विवादों के बीच राज्य की सुक्खू सरकार ने बड़ा और सख्त कदम उठाया है। अब तबादले से नाराज़ होकर सीधे अदालत का दरवाजा खटखटाना सरकारी कर्मचारियों को महंगा पड़ सकता है। सरकार ने साफ कर दिया है कि यदि कोई कर्मचारी पहले विभागीय स्तर पर अपनी शिकायत दर्ज कराए बिना सीधे हाईकोर्ट या अन्य अदालतों में जाता है, तो उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की जा सकती है।

राज्य के कार्मिक विभाग की ओर से इस सम्बंध में जारी कार्यालय ज्ञापन में यह नया प्रावधान जोड़ा गया है। सरकार ने इसे “कम्प्रीहेंसिव गाइडिंग प्रिंसिपल्स-2013” यानी तबादलों को नियंत्रित करने वाले नियमों में संशोधन के तौर पर लागू किया है।

सरकार के मुताबिक पिछले कुछ समय से यह देखा गया कि कई कर्मचारी तबादले के आदेश जारी होते ही सीधे अदालत पहुंच रहे हैं। जबकि फरवरी 2025 में जोड़े गए पैरा 22-ए में पहले ही यह व्यवस्था की गई थी कि कर्मचारी अपनी शिकायत पहले सक्षम प्राधिकारी या विभागीय स्तर पर रखें। इसके बावजूद कई मामलों में इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।

सरकार ने अपने आदेश में कहा है कि अदालतों में सीधे पहुंचने के कारण कुछ मामलों में स्टे ऑर्डर और अंतरिम राहत भी मिल रही है, जिससे प्रशासनिक कामकाज प्रभावित हो रहा है। इसी स्थिति को देखते हुए अब नियमों में और सख्ती लाई गई है।

नए प्रावधान के तहत यदि किसी कर्मचारी द्वारा इन निर्देशों का उल्लंघन किया जाता है, तो इसे गंभीर मामला माना जाएगा। ऐसे कर्मचारी के खिलाफ केंद्रीय सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1965 और अन्य लागू सेवा नियमों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की जा सकेगी। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस तरह के मामलों को सरकारी निर्देशों के उल्लंघन और कदाचार की श्रेणी में माना जाएगा।

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