चालू वित्त वर्ष 2026-27 में एक लाख करोड़ डॉलर के निर्यात का लक्ष्य : पीयूष गोयल
- DSS Admin
- Jul 03, 2026

- चालू वित्त वर्ष में वस्तु निर्यात 16-17 फीसदी, सेवा निर्यात 11 फीसदी बढ़ाने का लक्ष्य
नई दिल्ली, 03 जुलाई (हि.स)। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को कहा कि चालू वित्त वर्ष 2026-27 में सरकार ने एक लाख करोड़ डॉलर के कुल निर्यात का लक्ष्य रखा है। सरकार ने वस्तुओं के निर्यात को 16-17 फीसदी बढ़ाकर 530 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रखा है। सेवा क्षेत्र के निर्यात को भी वित्त वर्ष 2026-27 में 11 फीसदी बढ़ाकर 470 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य है।
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री ने ‘व्यापार बोर्ड’ की बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि भारत ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 में 1 ट्रिलियन डॉलर (एक लाख करोड़ डॉलर) के निर्यात करने का लक्ष्य रखा है। गोयल ने इसके लिए एक महत्वाकांक्षी रोडमैप पेश किया है, जो सामान और सर्विस दोनों तरह के निर्यात में जबरदस्त बढ़ोतरी पर आधारित है। बैठक के बाद संवाददाताओं से कहा कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों, उद्योग जगत के नेता, निर्यात जगत, व्यापार निकाय और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक फ़ायदेमंद बैठक हुई। इस बैठक में देश के निर्यात की रफ्तार और विनिर्माण इकोसिस्टम को मजबूत करने पर विस्तार से चर्चा हो पाई। इन सबसे बहुत अच्छे सुझाव मिले।
उन्होंने कहा कि बहुत सारी संभावनाओं के बारे में राज्य सरकारों से भी चर्चा हुई, सबने यह प्रतिज्ञा ली है कि हम चालू वित्त वर्ष 2026-27 में 1 ट्रिलियन डॉलर का निर्यात शत-प्रतिशत करेंगे। 38 विकसित देशों के बाजार भारत के लिए खुले हैं। गोयल ने कहा कि आज विश्व में जो हमारे प्रतिनिधिमंडल जा रहे हैं, उद्योग जगत के लोग जा रहे हैं, सब जगह से एक ही आवाज गूंजती है कि भारत एक विश्वसनीय साझेदार है। हमें भारत के साथ संबंध बढ़ाने हैं। आज देश में बड़ा उत्साह है और देश तैयार है।
गोयल ने लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन को बेहतर बनाकर व्यापार की लागत कम करके, जिला-स्तर की क्षमता का इस्तेमाल करके और 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को और आसान बनाकर निर्यात में प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने की जरूरत पर ज़ोर दिया। इसके साथ ही एंटरप्राइज और एमएसएमई के लिए ज्यादा मौके बनाने के लिए केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर सहयोग को बढ़ावा देने की बात कही। उन्होंने कहा कि ऐसे में हमें मिलकर भारतीय व्यवसायों की वैश्विक उपस्थिति बढ़ानी चाहिए और भारत को एक प्रमुख वैश्विक व्यापार और विनिर्माण हब बनाने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ना चाहिए।
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