झारखंड के सभी सदर-रेफरल अस्पतालों को मिलेंगी चार-चार अतिरिक्त एंबुलेंस, 15 दिनों में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के निर्देश

रांची, 19 जून (हि.स.)। झारखंड सरकार ने राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए सभी सदर और रेफरल अस्पतालों में चार-चार अतिरिक्त एंबुलेंस उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। यह एंबुलेंस व्यवस्था वर्तमान 108 एंबुलेंस सेवा से अलग होगी, ताकि गंभीर मरीजों को आपात स्थिति में समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जा सके।

यह घोषणा स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी और स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने शुक्रवार को राज्य के सभी जिलों के सिविल सर्जनों, अस्पताल अधीक्षकों (डीएस) और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आयोजित समीक्षा बैठक में की।

बैठक में राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था के विभिन्न पहलुओं की विस्तार से समीक्षा की गई। इसमें अस्पतालों की कार्यप्रणाली, चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता, दवाओं की आपूर्ति, एंबुलेंस सेवा, चिकित्सा संसाधनों की स्थिति तथा आगामी मानसून को देखते हुए तैयारियों पर विशेष चर्चा हुई।

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने इस मौके पर कहा कि एंबुलेंस संचालन प्रणाली को और अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनाने के लिए अस्पतालों को आवश्यक तकनीकी संसाधन एवं टैबलेट उपलब्ध कराए जाएंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि सिविल सर्जन अथवा अस्पताल अधीक्षक को सूचना मिलने के बाद तत्काल एंबुलेंस उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी तय की जाएगी, ताकि मरीजों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि अगले 15 दिनों के भीतर सभी जिले स्वास्थ्य सेवाओं में ठोस और दिखाई देने वाला सुधार सुनिश्चित करें। उन्होंने चेतावनी दी कि जनता के स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही, उदासीनता या कार्य में ढिलाई को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

मंत्री ने कहा कि यदि स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने में किसी प्रकार की प्रशासनिक या स्थानीय बाधा आती है तो संबंधित विधायक एवं जनप्रतिनिधियों के साथ समन्वय स्थापित कर उसका समाधान निकाला जाए। अधिकारियों को भयमुक्त होकर जनहित में पूरी निष्ठा और प्रतिबद्धता के साथ कार्य करना चाहिए।

डॉ. अंसारी ने सभी सिविल सर्जनों को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने सदर अस्पताल परिसरों में ही निवास करें और आपातकालीन परिस्थितियों में तत्काल उपलब्ध रहें। उन्होंने कहा कि बिना अनुमति मुख्यालय छोड़ने वाले अधिकारियों के खिलाफ निलंबन सहित कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। हालांकि कुछ अधिकारियों की लापरवाही के कारण सरकार की छवि प्रभावित होती है, जिसे अब किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।

बैठक के दौरान मंत्री ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के प्रबंध निदेशक शशि प्रकाश झा को निर्देश दिया कि सिविल सर्जनों को पर्याप्त प्रशासनिक अधिकार दिए जाएं, ताकि वे अपने जिलों में त्वरित और प्रभावी निर्णय ले सकें। उन्होंने कहा कि जिले की संपूर्ण स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए संबंधित सिविल सर्जन को पूर्ण रूप से जवाबदेह बनाया जाएगा।

स्वास्थ्यकर्मियों की हड़ताल और कार्य बहिष्कार जैसे मुद्दों पर मंत्री ने कहा कि सरकार पहले संवाद और आपसी समझ से समाधान निकालने का प्रयास करेगी। हालांकि यदि कोई कर्मचारी जनहित के विरुद्ध कार्य करता है तो उसके खिलाफ आवश्यक कार्रवाई भी की जाएगी। उन्होंने बताया कि कुछ कर्मचारियों के वेतन और अन्य भुगतान ट्रेजरी संबंधी तकनीकी कारणों से लंबित हैं, जिन्हें शीघ्र जारी करने की प्रक्रिया चल रही है।

इस अवसर पर स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने कहा कि अधिकारियों की जिम्मेदारी केवल कार्यालयों तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें जनता के बीच जाकर समस्याओं का समाधान भी सुनिश्चित करना होगा। उन्होंने कहा कि सरकार ने स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार के लिए अधिकारियों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी हैं और अब उनके सकारात्मक परिणाम जमीनी स्तर पर दिखाई देने चाहिए।

बैठक में राज्य के सभी जिलों के सिविल सर्जन, अस्पताल अधीक्षक, एनएचएम के वरिष्ठ अधिकारी तथा स्वास्थ्य विभाग के अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।

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