कपिल सिब्बल देश नहीं, कांग्रेस की आपातकालीन विरासत पर करें आत्ममंथन: पूर्व मंत्री

कपिल सिब्बल देश नहीं, कांग्रेस की आपातकालीन विरासत पर करें आत्ममंथन: पूर्व मंत्री


जम्मू, 15 जून । वरिष्ठ भाजपा नेता एवं पूर्व मंत्री बाली भगत ने राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल के हालिया बयानों पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए उन पर देश का अपमान करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि भारत पर सवाल उठाने से पहले सिब्बल को कांग्रेस पार्टी के इतिहास विशेषकर 1975-77 के आपातकाल के दौर पर आत्ममंथन करना चाहिए।

बाली भगत ने कहा कि यदि किसी बात पर शर्मिंदा होने की आवश्यकता है तो वह भारत नहीं बल्कि कांग्रेस द्वारा लगाया गया आपातकाल है। उन्होंने आरोप लगाया कि आपातकाल के दौरान लोकतंत्र को कुचला गया, विपक्षी नेताओं को जेलों में डाला गया, प्रेस की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाया गया और जबरन नसबंदी अभियान चलाया गया।

उन्होंने कहा कि 21 महीने तक चले आपातकाल के दौरान लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर किया गया तथा नागरिकों के मौलिक अधिकारों को निलंबित कर दिया गया। भगत के अनुसार उस अवधि में एक लाख से अधिक राजनीतिक कार्यकर्ताओं, पत्रकारों, छात्रों और विरोधी विचार रखने वाले लोगों को बिना मुकदमे के गिरफ्तार किया गया था।

उन्होंने कहा कि जयप्रकाश नारायण, मोरारजी देसाई, अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी जैसे प्रमुख नेताओं को भी जेल भेजा गया था। पूर्व मंत्री ने आपातकाल के दौरान चलाए गए नसबंदी अभियान को भारतीय इतिहास का सबसे काला अध्याय बताते हुए कहा कि इसका सबसे अधिक प्रभाव गरीब और वंचित वर्गों पर पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासनिक तंत्र के माध्यम से लोगों पर दबाव डालकर नसबंदी कराई गई।

कपिल सिब्बल पर निशाना साधते हुए बाली भगत ने कहा कि उन्हें पहले आपातकाल की ज्यादतियों पर अपना स्पष्ट रुख बताना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रवाद राजनीतिक सुविधा का विषय नहीं बल्कि देश और उसके बलिदानों के प्रति सम्मान और प्रतिबद्धता का प्रतीक है। भगत ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और उससे जुड़े नेताओं ने समय-समय पर राष्ट्रीय सुरक्षा, सांस्कृतिक विरासत और आस्था से जुड़े मुद्दों पर ऐसे रुख अपनाए हैं जिनसे देशवासियों की भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने कहा कि भारत की एकता, संप्रभुता और लोकतांत्रिक मूल्यों का निर्माण स्वतंत्रता सेनानियों, सैनिकों और देशभक्त नागरिकों के बलिदान से हुआ है तथा इसे राजनीतिक बयानों के जरिए कमजोर नहीं किया जा सकता।

उन्होंने कहा कि देश की जनता अपने राष्ट्र पर गर्व करती है और आपातकाल के इतिहास को भूली नहीं है। जनता देशभक्ति पर उपदेश उन लोगों से स्वीकार नहीं करेगी जो लगातार भारत की छवि को नुकसान पहुंचाने वाले बयान देते हैं।

   

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