हिमाचल में शहरी दुकानदारों को 40 साल की लीज का प्रस्ताव, सुक्खू सरकार लाई नया मसौदा नियम

शिमला, 10 जून (हि.स.)। शहरों में दशकों से दुकानें चला रहे हजारों कारोबारियों के लिए हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार बड़ा बदलाव करने जा रही है। सरकार ने मुख्यमंत्री शहरी कारोबारी कल्याण नियम, 2026 का मसौदा जारी किया है। इसके तहत नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायतों की संपत्तियों में पिछले 10 साल या उससे अधिक समय से कारोबार कर रहे दुकानदारों को 40 साल तक की लीज देने का प्रस्ताव रखा गया है। सरकार का मानना है कि इससे लंबे समय से कारोबार कर रहे लोगों को भविष्य की अनिश्चितता से राहत मिलेगी और उनके व्यवसाय को स्थायित्व मिलेगा।

बिना नीलामी मिलेगा मौका, लेकिन शर्तें भी होंगी

मसौदे के अनुसार नगर निकायों की दुकानों, स्टॉलों, मकानों और तहबाजारी स्थलों पर 10 साल या उससे अधिक समय से काबिज लोगों को इस योजना का लाभ मिल सकेगा। नई दुकानों की लीज राशि सार्वजनिक नीलामी या ई-नीलामी से तय होगी, लेकिन वर्ष 2001 के नियमों के तहत पहले से आवंटित दुकानों के मौजूदा कब्जाधारकों को बिना नीलामी सीधे 40 साल की लीज देने का प्रस्ताव है। इसके लिए जरूरी होगा कि उनके ऊपर किराये का कोई बकाया न हो, वे नई लीज राशि देने को तैयार हों और सभी आवश्यक दस्तावेज जमा करें। दुकानों का किराया तय करने के लिए नया फॉर्मूला भी प्रस्तावित किया गया है, जिसके तहत मासिक किराया संबंधित क्षेत्र के प्रचलित सर्किल रेट के 10 प्रतिशत के आधार पर निकाला जाएगा।

एकमुश्त भुगतान पर 20 फीसदी तक छूट का प्रस्ताव

सरकार ने लीज को आकर्षक बनाने के लिए छूट की व्यवस्था भी प्रस्तावित की है। यदि कोई दुकानदार 40 साल की पूरी लीज राशि एक साथ जमा करता है तो उसे 20 प्रतिशत की छूट मिलेगी। 30 साल की राशि पर 15 प्रतिशत, 20 साल पर 10 प्रतिशत और 10 साल पर 5 प्रतिशत की छूट का प्रावधान रखा गया है। जो लोग हर साल अप्रैल में एकमुश्त वार्षिक भुगतान करेंगे, उन्हें भी 5 प्रतिशत की छूट मिलेगी, हालांकि ऐसे मामलों में किराये में हर पांच साल बाद 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी। 40 साल की मूल अवधि पूरी होने के बाद लीज को आगे 40 साल तक बढ़ाने का विकल्प भी दिया गया है और उस पर भी इसी प्रकार की छूट लागू होगी।

आवेदन ऑनलाइन होंगे, समझौता नहीं किया तो हो सकती है बेदखली

सरकार पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन करने जा रही है। इसके लिए एक साझा वेब पोर्टल बनाया जाएगा, जहां आवेदन, दस्तावेज, दावे और आपत्तियां अपलोड की जाएंगी। आवेदन सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होगा और किसी भी व्यक्ति को 30 दिन के भीतर आपत्ति दर्ज कराने का मौका मिलेगा। तय समय सीमा में जांच और मंजूरी की प्रक्रिया पूरी की जाएगी तथा मंजूरी मिलने के पांच दिन के भीतर लीज राशि जमा करनी होगी। मसौदे में यह भी कहा गया है कि यदि कोई मौजूदा दुकानदार लीज का प्रस्ताव मिलने के दो महीने बाद भी समझौता नहीं करता, तो नगर निकाय उसका एनओसी वापस ले सकता है, पानी और सीवरेज कनेक्शन काट सकता है तथा बेदखली की कार्रवाई शुरू कर सकता है। इसके बाद संबंधित संपत्ति को खाली करवाकर खुली ई-नीलामी में डाल दिया जाएगा। सरकार ने इन मसौदा नियमों पर आम लोगों से 30 दिन के भीतर सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं, जिसके बाद इन्हें अंतिम रूप दिया जाएगा।

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