पंजाब में सरकारी बसों की हड़ताल का व्यापक असर, हजारों यात्री परेशान
- Neha Gupta
- Jun 10, 2026

चंडीगढ़, 10 जून । पंजाब में सरकारी बसों की हड़ताल का व्यापक असर आम जनता पर देखने को मिल रहा है। पनबस और पंजाब रोडवेज के कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों की हड़ताल से राज्यभर में हजारों यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
बुधवार दोपहर 12 बजे से शुरू हुई इस हड़ताल के चलते विभिन्न जिलों में सरकारी बस सेवाएं प्रभावित हो गई हैं, जिससे रोजाना सफर करने वाले यात्रियों, छात्रों, मरीजों और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
प्रदेश में लगभग 3,000 पीआरटीसी और 1,600 पनबस की बसें संचालित होती हैं। इन बसों के संचालन के लिए करीब 5,500 कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी और 4,500 नियमित कर्मचारी कार्यरत हैं। ऐसे में यदि कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी पूरी तरह से काम बंद कर देते हैं, तो आधे से अधिक सरकारी बसें सड़कों से गायब हो सकती हैं। पंजाब रोडवेज और पनबस राज्य के भीतर तथा अंतरराज्यीय मार्गों पर बसों का विशाल नेटवर्क संचालित करते हैं, जो प्रतिदिन लगभग 5 लाख यात्रियों को परिवहन सुविधा प्रदान करता है। ऐसे में हड़ताल का असर लाखों लोगों की दैनिक दिनचर्या पर पड़ना स्वाभाविक है।
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि सरकार के साथ कई दौर की बातचीत के बावजूद उनकी मांगों का कोई समाधान नहीं निकला। इसी कारण उन्हें आंदोलन और चक्का जाम का रास्ता अपनाना पड़ा। इसका सबसे बड़ा खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है। पंजाब के अधिकांश ग्रामीण इलाकों में सरकारी बसें ही लोगों के लिए मुख्य परिवहन साधन हैं। बस सेवाएं प्रभावित होने से गांवों के लोगों को शहरों तक पहुंचने में परेशानी हो रही है और उन्हें निजी वाहनों या महंगे विकल्पों का सहारा लेना पड़ रहा है।
गर्मी की छुट्टियों के चलते बड़ी संख्या में परिवार पर्यटन स्थलों की ओर जा रहे हैं। ऐसे समय में सरकारी बसों की कमी ने यात्रियों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
इसके अलावा कॉलेजों और अन्य शिक्षण संस्थानों में दाखिले की प्रक्रिया चल रही है, जिससे विद्यार्थियों को भी यात्रा संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। अस्पतालों में इलाज के लिए जाने वाले मरीजों और उनके परिजनों पर भी इसका असर पड़ा है। खासकर पीजीआई और अन्य बड़े अस्पतालों तक पहुंचने वाले लोगों को अतिरिक्त समय और खर्च वहन करना पड़ रहा है। महिलाओं को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि पंजाब सरकार की मुफ्त बस यात्रा योजना का लाभ लेने वाली हजारों महिलाएं अब वैकल्पिक साधनों पर निर्भर हो गई हैं।
हड़ताल का असर केवल यात्रियों तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी राजस्व पर भी पड़ सकता है। पंजाब रोडवेज और पनबस की प्रतिदिन की आय लगभग 2 से 3 करोड़ रुपये के बीच रहती है, जबकि पीआरटीसी की दैनिक कमाई करीब 2.5 से 3 करोड़ रुपये होती है। ऐसे में यदि तीन दिन तक पूर्ण चक्का जाम जारी रहता है, तो सरकार को 12 से 15 करोड़ रुपये तक का सीधा वित्तीय नुकसान हो सकता है।
पीआरटीसी और पनबस कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी यूनियन के महासचिव शमशेर सिंह ने बताया कि कर्मचारियों की मांगों को लेकर 8 मई, 2 जून और 4 जून को सरकार के साथ बैठकें हुई थीं, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों ने मजबूरी में यह कदम उठाया है और जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक संघर्ष जारी रहेगा।------------------

