बुन्देलखण्ड के तालाबों की गूंज विश्व मंच तक पहुंची, नेपाल में सम्मानित हुए रामबाबू तिवारी

बांदा, 17 जून (हि.स.)। बुन्देलखण्ड की पारंपरिक जल संचयन प्रणालियों और तालाबों पर किए गए महत्वपूर्ण शोध के लिए गोविंद बल्लभ पंत सामाजिक विज्ञान संस्थान के शोधार्थी व उत्तर प्रदेश के जनपद बांदा के अधांव गांव निवासी रामबाबू तिवारी को नेपाल के लुंबिनी में आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में ‘अंतरराष्ट्रीय अन्वेषक गौरव सम्मान’ से सम्मानित किया गया। यह सम्मान भारतीय पारंपरिक जल ज्ञान और सामुदायिक जल प्रबंधन की वैश्विक स्वीकृति का प्रतीक माना जा रहा है।

लुंबिनी बौद्ध विश्वविद्यालय, नेपाल, लाल बहादुर शास्त्री स्मारक पी.जी. कॉलेज तथा कालिंदी प्रकाशन, भारत के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी (15 और 16 जून) में चार देशों के विद्वानों ने भाग लिया। “शिक्षा, साहित्य, समाज और संस्कृति का वैश्विक विमर्श: चुनौतियाँ, अवसर एवं संभावनाएँ” विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में लगभग 140 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए।

रामबाबू तिवारी ने अपने शोध पत्र में बुन्देलखण्ड के तालाबों की परंपरा, सामाजिक-आर्थिक महत्व तथा जल संरक्षण में उनकी वैज्ञानिक उपयोगिता पर प्रकाश डाला। उन्होंने बुधवार को मोबाइल से बातचीत में उक्त जानकारी दी। उन्होंने बताया कि तालाबों का संरक्षण और पुनर्जीवन न केवल जल संकट के समाधान में सहायक है, बल्कि भूजल स्तर सुधार, जैव विविधता संरक्षण और ग्रामीण विकास के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

सम्मान प्राप्त करने के बाद तिवारी ने इसे अपने गुरुजनों, सहयोगियों और संस्थान के सामूहिक प्रयासों का परिणाम बताते हुए जल संरक्षण के प्रति जनजागरण की आवश्यकता पर बल दिया। यह उपलब्धि स्थानीय शोध को वैश्विक पहचान मिलने का प्रेरक उदाहरण है।

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